देहरादून। वरिष्ठ संवाददाता
उत्तराखंड वन विकास निगम में चाय–मिठाई के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। निगम के विभिन्न कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठकों व कार्यक्रमों के लिए जारी की गई चाय, कॉफी और रिफ्रेशमेंट की फर्जी बिलिंग के जरिए लाखों रुपये खर्च दिखाए गए।
शुरुआती जांच में सामने आया कि कई स्थानों पर कागज़ों में रेस्टोरेंट दिखाए गए, जबकि वास्तव में वहां कोई रेस्टोरेंट मौजूद ही नहीं था। लेखा विभाग के कुछ कर्मचारियों पर गलत भुगतान करने और बिलों की जांच के दौरान अनियमितताओं को अनदेखा करने के आरोप लगे हैं।
जांच में धांधली की पुष्टि
मुख्य सतर्कता अधिकारी (मुख्य सतर्कता अधिकारी का नाम खबर में नहीं दिया है) द्वारा की गई प्राथमिक जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि रेस्टोरेंट के नाम पर फर्जी बिल, भुगतान की अनियमित प्रक्रिया और बिना सत्यापन के पास किए गए बिल निगम में लंबे समय से चल रहे थे।
जांच में यह भी पाया गया कि कई मदों में एक दिन में अत्यधिक चाय–कॉफी और स्नैक्स दिखाकर भुगतान पास किया गया, जो व्यावहारिक रूप से संभव ही नहीं था। इसके अलावा, जिस रेस्टोरेंट के नाम से बिल लगाए गए, उसकी न तो लोकेशन सत्यापित पाई गई और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक संचालन।
रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि यह धांधली लेखा विभाग और संबंधित कार्यालयों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं थी।
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
खबर के अनुसार, जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि संबंधित अधिकारियों ने बिल पास करने से पहले न तो स्थल निरीक्षण किया, न ही भुगतान का कोई उचित सत्यापन। कई मामलों में एक ही रेस्टोरेंट से लगातार बड़े-बड़े बिल पास किए जाते रहे, जबकि वह रेस्टोरेंट वास्तविकता में अस्तित्व ही नहीं रखता था।
इस मामले में जिम्मेदार अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाते हुए कड़ी कार्रवाई की अनुशंसाएं की हैं।
निगम मुख्यालय ने कहा – कार्रवाई होगी
वन विकास निगम के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि प्रारंभिक जांच में अनियमितताएँ सामने आई हैं और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निगम की छवि को धूमिल करने वाली इस फर्जीवाड़े की घटना ने विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वन निगम में चाय–मिठाई के नाम पर हुए इस गड़बड़झाले को लेकर अब आगे की कार्रवाई का इंतज़ार है। उम्मीद की जा रही है कि विस्तृत जांच में पूरे घोटाले की परतें खुलेंगी और दोषियों पर ठोस कदम उठाया जाएगा।


