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उत्तराखंड तैयार है सर्दियों का जश्न मनाने के लिए: हेलिकॉप्टर स्कीइंग और अल्ट्रा मैराथन से गरमाएगा पर्यटन

देहरादून: उत्तराखंड, जो गर्मियों में अपनी चारधाम यात्रा के लिए दुनियाभर में मशहूर है, अब सर्दियों के मौसम में भी पर्यटन को गति देने के लिए एक बड़ी पहल कर रहा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि चारधाम यात्रा के समाप्त होने के बाद भी पर्यटन का पहिया थमने न पाए। इसी कड़ी में, इस सर्दी में पर्यटकों के लिए कुछ अभूतपूर्व और रोमांचकारी गतिविधियों की पेशकश की जा रही है, जिसमें पहली बार हेलिकॉप्टर से स्कीइंग जैसा अनूठा अनुभव शामिल है।

प्राकृतिक आपदाओं के बाद पर्यटन को नई रफ्तार

इस साल प्रदेश ने प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया, जिससे चारधाम यात्रा भी प्रभावित रही और पर्यटन उद्योग को काफी नुकसान झेलना पड़ा। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने पर्यटन को पटरी पर लाने और सालभर इसके चलते रहने की ठान ली है। इस रणनीति का केंद्र बिंदु है – साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism)। माना जा रहा है कि साहसिक खेलों में रुचि रखने वाले पर्यटक, पारंपरिक तीर्थयात्रियों की तुलना में अधिक खर्च करते हैं और यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हेलिकॉप्टर स्कीइंग: एक नया इतिहास रचने की तैयारी

उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर सबसे चर्चित नाम इस सर्दी में ‘हेलिकॉप्टर स्कीइंग’ का है। पर्यटन विभाग ने इस अभिनव परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। आमतौर पर, स्कीइंग के लिए पर्यटकों को केबल कार या अन्य साधनों से ऊपर चढ़ना पड़ता है, लेकिन हेलिकॉप्टर स्कीइंग में एक हेलिकॉप्टर स्कीयर को सीधे बर्फ से ढके एक ऊंचे और दुर्गम पहाड़ की चोटी पर छोड़ देगा। वहां से नीचे की ओर स्कीइंग करने का रोमांच ही कुछ और होगा। यह सेवा विश्वस्तरीय स्कीयर और रोमांच के शौकीन लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करेगी और उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय साहसिक पर्यटन का केंद्र बनाने में मदद करेगी।

औली में पारंपरिक स्कीइंग का मजा

हेलिकॉप्टर स्कीइंग के अलावा, उत्तराखंड का प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट औली (चमोली) इस सर्दी में स्कीइंग उत्साहियों के लिए तैयार है। अपनी बर्फीली ढलानों और खूबसूरत नज़ारों के लिए मशहूर औली, देशभर के स्कीयर को आकर्षित करता है। पर्यटन विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि इस सीजन में औली में सभी सुविधाएं पर्यटकों को बेहतरीन मुहैया कराई जाएं।

आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन: सहनशक्ति की परीक्षा

सर्दियों के सीजन की शुरुआत 2 नवंबर को एक और बड़े आयोजन से होगी। पर्यटन विभाग की ओर से आदि कैलाश में पांच हजार फीट की ऊंचाई पर एक अल्ट्रा मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। इस मैराथन में देश-विदेश से एक हजार से अधिक धावक हिस्सा लेने की उम्मीद है। ऊंचाई पर दौड़ने की यह चुनौती न सिर्फ खिलाड़ियों के लिए एक यादगार अनुभव होगी, बल्कि इससे स्थानीय स्तर पर होम स्टे और छोटे होटलों के कारोबार को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।

ट्रेकिंग, राफ्टिंग, और पैराग्लाइडिंग का भी है पैकेज

सरकार की योजना सिर्फ स्कीइंग और मैराथन तक सीमित नहीं है। पूरे शीतकाल में ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, और पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा। इन गतिविधियों के लिए उत्तराखंड में प्राकृतिक संसाधनों की कोई कमी नहीं है। इन्हें बढ़ावा देकर सरकार का उद्देश्य उन युवा पर्यटकों को आकर्षित करना है, जो रोमांच और एक नई ऊर्जा की तलाश में हिमालय की तरफ देखते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

पर्यटन सचिव श्री धीराज गर्ब्याल के अनुसार, “शीतकाल में साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से तैयारियां शुरू की गई हैं।” इन तैयारियों का सीधा फायदा स्थानीय लोगों को मिलेगा। गाइड, होम स्टे, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां, और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों के लिए यह सीजन नए आर्थिक अवसर लेकर आएगा।

साफ है कि उत्तराखंड अब साल के बारह महीने पर्यटकों को आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हेलिकॉप्टर स्कीइंग जैसे नवाचारी कदम और आदि कैलाश अल्ट्रा मैराथन जैसे बड़े आयोजन न सिर्फ प्रदेश को साहसिक पर्यटन का हब बनाएंगे, बल्कि प्राकृतिक आपदा से उबरने में भी इसकी अर्थव्यवस्था की मदद करेंगे। इस सर्दी में, उत्तराखंड सिर्फ बर्फ की सफेद चादर ही नहीं, बल्कि रोमांच और साहस के रंग भी बिखेरने के लिए तैयार है।