देहरादून। उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार आधुनिक तकनीक आधारित उपकरणों की स्थापना करने जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण आने वाले महीनों में विभिन्न जिलों में 38 स्वचालित मौसम केंद्र और नए डॉप्लर रडार स्थापित करेगा, ताकि मौसम पूर्वानुमान अधिक सटीक हो और जनहानि व संपत्ति के नुकसान को कम किया जा सके।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि Uttarakhand State Disaster Management Authority के तहत रक्षा भू-सूचना अनुसंधान प्रतिष्ठान द्वारा 10 जिलों में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन लगाए जाएंगे। इनमें उत्तरकाशी और टिहरी में सर्वाधिक आठ-आठ स्टेशन स्थापित होंगे। इसके बाद पौड़ी में सात, देहरादून में पांच, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में तीन-तीन, अल्मोड़ा में दो तथा नैनीताल और हरिद्वार में एक-एक स्टेशन लगाए जाएंगे। इन केंद्रों से वास्तविक समय में मौसम संबंधी सटीक आंकड़े प्राप्त होंगे, जिससे समय पर चेतावनी जारी करना संभव होगा।
इसके अतिरिक्त India Meteorological Department द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत और चमोली में डॉप्लर रडार स्थापित किए जाएंगे। इन रडारों के माध्यम से वर्षा, बादलों की गतिविधियों और अन्य मौसमीय परिवर्तनों की निगरानी और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। जिला प्रशासन को भूमि चिन्हित कर शीघ्र प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
हाल ही में सभी 13 जिलों के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव ने निर्देश दिए कि आपदा से संबंधित मदों में हुए व्यय का विवरण राष्ट्रीय पोर्टल पर समय से अपलोड किया जाए। इसके लिए National Disaster Management Authority के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम पोर्टल पर नियमित अपडेट अनिवार्य बताया गया है, ताकि पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
सचिव ने यह भी कहा कि जिलों में उपलब्ध आपदा प्रबंधन उपकरणों का जीआईएस मैपिंग किया जाएगा और सभी विभाग मानसून से पहले India Disaster Resource Network पोर्टल पर अपने संसाधनों का पूरा विवरण अपलोड करें। इससे आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सहायता मिलेगी।
संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सभी जिलों में रुद्रप्रयाग की तर्ज पर डिजास्टर डेडिकेटेड रेडियो नेटवर्क प्रणाली स्थापित की जाएगी। साथ ही तहसील स्तर पर आपातकालीन संचालन केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर समन्वय बेहतर हो सके और किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में वर्ष 2025 में आपदाओं में मृत नेपाली मूल के व्यक्तियों के मामलों की समीक्षा भी की गई। सचिव ने जिलाधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए, ताकि आर्थिक सहायता और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके। लापता व्यक्तियों को मृत घोषित करने से संबंधित लंबित मामलों को भी तेजी से निपटाने पर जोर दिया गया, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।


