देहरादून। उत्तराखंड के शहरों में हवा की गुणवत्ता (Air Quality) में गिरावट देखी जा रही है। हाल के दिनों में धुंध और धूल के बढ़ते स्तर को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) ने सक्रिय होकर अनोखा कदम उठाया है। बोर्ड ने राज्य के तीन शहरों – देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में कुल 17 स्थानों पर ड्रोन के माध्यम से पानी के छिड़काव (Water Sprinkling) का काम शुरू कर दिया है ताकि हवा में मौजूद धूल के कणों को नियंत्रित किया जा सके।
एक्यूआई में दिखा बदलाव, संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में पहुंचे शहर
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े, इस बदलाव की पुष्टि कर रहे हैं। देहरादून में जहां पिछले पांच दिनों तक AQI संतोषजनक (Satisfactory) श्रेणी में बना हुआ था, वह अब मध्यम (Moderate) श्रेणी में पहुंच गया है। इसी तरह काशीपुर में 17 अक्टूबर को AQI संतोषजनक श्रेणी में दर्ज किया गया, लेकिन 18 अक्टूबर को यह बढ़कर मध्यम श्रेणी में आ गया। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुद्रपुर जैसे शहरों में भी हवा की गुणवत्ता में बदलाव देखने को मिला है, जो चिंता का विषय बना हुआ है।
पिछले साल से बढ़ा दायरा, अब तीन शहरों में चल रहा है अभियान
प्रदूषण से निपटने के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल इस साल और विस्तार से किया जा रहा है। जहां पिछले साल यह प्रयोग केवल देहरादून शहर तक ही सीमित था, वहीं इस बार इसे ऋषिकेश और काशीपुर तक बढ़ा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते (Dr. Parag Madhukar Dhakate) ने बताया कि रविवार से इस अभियान की शुरुआत की गई है।
उन्होंने बताया, “देहरादून में घंटाघर समेत शहर की नौ अलग-अलग जगहों पर तीन ड्रोनों के जरिए पानी का छिड़काव किया गया। इसके अलावा, ऋषिकेश और काशीपुर में भी एक-एक ड्रोन के माध्यम से यह कार्य किया जा रहा है।” इस तरह अब तक कुल 17 स्थानों पर इस तकनीक की मदद से हवा को साफ करने का प्रयास किया जा चुका है।
कैसे काम करती है ड्रोन तकनीक?
ड्रोन के जरिए पानी का बारीक छिड़काव किया जाता है। यह पानी की बूंदें हवा में मौजूद धूल (Dust) और प्रदूषण के सूक्ष्म कणों (PM Particles) से टकराकर उन्हें नीचे जमीन पर गिरा देती हैं। इस प्रक्रिया से हवा की सतही परत में मौजूद प्रदूषकों को तत्काल नियंत्रित करने में मदद मिलती है और कुछ ही देर में आसपास का वातावरण साफ और ताजगी भरा महसूस होता है।
भविष्य में भी जारी रहेगा अभियान
डॉ. धकाते ने स्पष्ट किया कि हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए यह अभियान आगे भी जारी रखा जाएगा। मौसम में बदलाव और निर्माण गतिविधियों के कारण धूल का स्तर बढ़ने पर समय-समय पर इस तरह के उपाय किए जाते रहेंगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार AQI की निगरानी कर रहा है और आवश्यकता के अनुसार अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए नवीन तरीके अपना रहा है। हालांकि, दीर्घकालिक समाधान के लिए वाहनों के उत्सर्जन पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और हरित आवरण बढ़ाने जैसे कदमों पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। आम नागरिकों का भी यह दायित्व है कि वे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें।


