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कश्मीर में ‘मिल्क क्वीन’ सानेन बकरी की एंट्री, किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के पशुपालन विभाग ने डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए स्विट्जरलैंड की मशहूर सानेन नस्ल की बकरी को कश्मीर में शामिल किया है। यह नस्ल “मिल्क क्वीन” के नाम से जानी जाती है और अपनी ज्यादा दूध देने की क्षमता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से स्थानीय किसानों को दूध उत्पादन बढ़ाने और आय में सुधार करने में मदद मिलेगी। विभाग का कहना है कि यह कदम आधुनिक और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, जिसके तहत किसानों को पालन-पोषण, आहार और प्रबंधन से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

सानेन बकरी की खासियत और फायदे:
सानेन बकरी को दुनिया की सबसे ज्यादा दूध देने वाली नस्लों में गिना जाता है। एक बकरी साल में करीब 300 दिन करीब 2 से 3 लीटर तक दूध दे सकती है, जबकि अच्छे प्रबंधन में इससे भी ज्यादा उत्पादन संभव है। यह नस्ल पूरी तरह सफेद रंग की होती है, स्वभाव से शांत और आसानी से संभाली जा सकती है, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के किसान इसे पाल सकते हैं। इसके दूध की एक खास बात यह भी है कि यह पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाला माना जाता है, जिससे डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दही और चीज बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है।

इसके अलावा, सानेन बकरी तेजी से बढ़ती है और प्रजनन क्षमता भी अच्छी होती है, जिससे किसान कम समय में अपने पशुधन को बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नस्ल के आने से कश्मीर में डेयरी क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।