नैनीताल: जोशीमठ और श्रीनगर के बाद अब उत्तराखंड का मशहूर पर्यटन स्थल नैनीताल भी भूस्खलन के बड़े खतरे में फंसता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर हर साल 5 से 6 मिलीमीटर तक नीचे धंस रहा है। यह बात डीएसबी कैंपस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) के प्रोफेसर गिरीश कोठारी ने कही। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शहर पर बोझ कम नहीं किया गया, तो हालात और खराब हो सकते हैं।
प्रोफेसर कोठारी ने बताया कि नैनीताल की जमीन अब ज्यादा वजन सहन नहीं कर पा रही है। घरों और इमारतों का भार इतना बढ़ गया है कि शहर धीरे-धीरे नीचे सरक रहा है। भूस्खलन का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। तल्लीताल, भवाली और पाइलट बाबा आश्रम जैसे इलाके धीरे-धीरे खिसक रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर को बचाने के लिए निर्माण कार्यों पर रोक लगानी चाहिए और बोझ कम करने के कदम उठाने जरूरी हैं।
यह समस्या सिर्फ नैनीताल की नहीं है। पूरे हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन अब साल भर की समस्या बन गई है। पहले यह सिर्फ बारिश के मौसम में होती थी, लेकिन अब विकास कार्यों और ज्यादा निर्माण की वजह से साल भर खतरा बना रहता है। एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नैनीताल की मॉल रोड पर भी भूस्खलन का नया खतरा मंडरा रहा है। सात साल पहले यहां सुधार कार्य किए गए थे, लेकिन अब फिर से जमीन धंसने की शिकायतें आ रही हैं। कारणों में अस्थिर मिट्टी, पानी के स्रोत, भारी बारिश और पर्यटकों की भीड़ शामिल हैं। इससे सड़कें, इमारतें और पैदल रास्ते खतरे में हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है, क्योंकि नैनीताल पर्यटन पर निर्भर है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से भी यह पुष्टि होती है। सेंटिनल-1 सैटेलाइट डेटा से किए गए एक शोध में पाया गया कि नैनीताल के कुछ इलाकों में धंसाव की दर 25 मिलीमीटर प्रति वर्ष तक पहुंच गई है। जैसे शेर-का-डांडा पहाड़ी और बालिया नाला के आसपास के क्षेत्रों में जमीन सबसे ज्यादा खिसक रही है। कुल मिलाकर, शहर के 12 जोनों में धंसाव -43 से -65 मिलीमीटर तक मापा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, ज्यादा निर्माण और भूगर्भीय फॉल्ट लाइनें इसकी मुख्य वजह हैं।
सरकार और प्रशासन इस पर नजर रखे हुए हैं। पहले मॉल रोड पर मिट्टी मजबूत करने और पानी निकासी के काम किए गए थे, लेकिन अब नए कदमों की जरूरत है। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि नए निर्माण पर सख्त नियम बनाएं, पर्यटकों की संख्या सीमित करें और जंगलों को बचाएं। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो नैनीताल जैसे खूबसूरत शहर को बड़ा नुकसान हो सकता है।
काफलट्रीलाइव डॉट कॉम इस मुद्दे पर लगातार अपडेट देता रहेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों से अपील है कि शहर को बचाने के लिए सभी मिलकर काम करें।


