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दिवाकर भट्ट के निधन पर हरीश रावत ने लिखा भावुक पोस्ट: ‘राज्य रत्न’ और ‘पद्मभूषण’ की मांग

हरिद्वार: उत्तराखंड की राजनीति के एक प्रमुख स्तंभ और उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) के संस्थापक दिवाकर भट्ट का मंगलवार शाम हरिद्वार में निधन हो गया। 79 वर्षीय पूर्व कैबिनेट मंत्री लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले दस दिनों से देहरादून के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। उनके निधन की खबर ने पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ा दी है।

इस दुखद घटना पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक भावुक पोस्ट साझा किया। रावत ने न केवल भट्ट को श्रद्धांजलि दी, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार से उन्हें सम्मानित करने की ठोस मांग भी रखी।

“काश, हम उन्हें बेहतर इलाज दिला पाते” – हरीश रावत

हरीश रावत ने अपने शोक संदेश में कहा कि दिवाकर भट्ट का चले जाना एक दिल दहला देने वाला क्षण है। उन्होंने खुलासा किया कि वह पिछले कुछ दिनों से भट्ट की तबीयत बिगड़ने की खबरें सुन रहे थे और उनसे मिलने का मन बना रहे थे, लेकिन यह मुलाकात नहीं हो सकी। रावत ने कहा, “मैं सोच भी नहीं सकता था कि दिवाकर भट्ट जैसे जुझारू व्यक्तित्व का अंत इतनी चुपचाप हो जाएगा।

रावत ने एक तरह का पश्चाताप भी जताया और कहा, “काश, हम उन्हें दिल्ली या मुंबई ले जाकर उच्च चिकित्सा सुविधा दिला पाते।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ लोग इतने संघर्षशील होते हैं कि लगता है वह हर बीमारी को मात देकर फिर उठ खड़े होंगे… लेकिन इस बार वह हम सबको छोड़कर चले गए।”

राज्य रत्न और पद्मभूषण देने की उठाई मांग

दिवाकर भट्ट के उत्तराखंड के लिए किए गए अविस्मरणीय योगदान को रेखांकित करते हुए हरीश रावत ने एक महत्वपूर्ण सिफारिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि दिवाकर भट्ट को राज्य रत्न सम्मान प्रदान करे और भारत सरकार को उन्हें पद्मभूषण देने पर विचार करना चाहिए।

रावत ने जोर देकर कहा कि राज्य के निर्माण से लेकर जनसंघर्ष की राजनीति तक, भट्ट की भूमिका इतनी उल्लेखनीय रही है कि उनकी अनुपस्थिति राज्य की राजनीति में एक बड़ी रिक्तता छोड़ जाएगी। यह मांग उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में सामने आई है।

“वह मेरे आलोचक रहे, लेकिन प्रेरणा भी थे”

रावत ने अपने और दिवाकर भट्ट के रिश्तों के एक दिलचस्प पहलू को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भट्ट हमेशा उनके आलोचक रहे, लेकिन इसके बावजूद उनके संघर्ष ने हमेशा रावत को प्रेरित किया। रावत ने कहा कि संघर्ष समिति में वह लंबे समय तक उनके करीब नहीं रह पाए, लेकिन उन्होंने कई बार भट्ट को अपने साथ लाने की कोशिश की।

अपने संदेश के अंत में, हरीश रावत ने दिवाकर भट्ट के निधन को उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की एक “अपूरणीय क्षति” बताया। उन्होंने भट्ट के परिवार, उक्रांद पार्टी और उनके सभी समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और प्रार्थना की कि भगवान दिवाकर भट्ट की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

दिवाकर भट्ट के जाने से उत्तराखंड ने एक ऐसा नेता खो दिया है जो हमेशा अपनी स्पष्टवादिता और जमीनी संघर्ष के लिए जाने जाते थे। हरीश रावत का यह भावुक पोस्ट न केवल एक सहयोगी के प्रति श्रद्धा है, बल्कि राज्य से उसके एक सच्चे सपूत को सम्मानित करने की एक पुकार भी है।