आजकल पेरेंटिंग के तरीकों पर बहुत बहस हो रही है। पुराने जमाने में माता-पिता बच्चों को सख्ती से डांटते या सजा देते थे, लेकिन अब एक नया तरीका चर्चा में है – “जेंटल पेरेंटिंग”। यह तरीका बच्चों के साथ सहानुभूति, समझदारी और सम्मान से पेश आने पर जोर देता है। इसमें चिल्लाना, मारना या सजा देने की बजाय बच्चों की भावनाओं को समझना और उन्हें सिखाना शामिल है। लेकिन सवाल यह है कि यह तरीका इतना क्यों लोकप्रिय हो रहा है और क्या यह वाकई कारगर है? आइए देखते हैं रिसर्च, विशेषज्ञों की राय और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं से।
जेंटल पेरेंटिंग की शुरुआत मिलेनियल और जेन जी पेरेंट्स से हुई, जो अपने बचपन की सख्त परवरिश से अलग होना चाहते हैं। 2024 की एक स्टडी में, मैकलेस्टर कॉलेज की प्रोफेसर एनी पेजाला और रॉलिंस कॉलेज की प्रोफेसर एलिस डेविडसन ने 100 से ज्यादा अमेरिकी पेरेंट्स का सर्वे किया। उन्होंने पाया कि जेंटल पेरेंटिंग में पेरेंट्स अपनी भावनाओं को कंट्रोल करते हैं, बच्चों को भावनाएं पहचानने में मदद करते हैं और ज्यादा प्यार दिखाते हैं। लेकिन 40% से ज्यादा पेरेंट्स ने बताया कि इससे उन्हें थकान, खुद पर शक और अकेलापन महसूस होता है। इसी स्टडी को जुलाई 2025 में साइकोलॉजी टुडे में छापा गया, जहां डॉ. डेविडसन ने कहा कि जेंटल पेरेंटिंग भावनात्मक विकास के लिए अच्छा है, लेकिन पेरेंट्स पर बहुत दबाव डालता है।
2025 की सीएनएन रिपोर्ट में भी जेंटल पेरेंटिंग की तारीफ की गई। इसमें बताया गया कि यह तरीका बच्चों में चिंता कम करता है और सामाजिक स्किल्स बढ़ाता है। न्यूयॉर्क पोस्ट की 2025 की स्टडी से पता चला कि 38% पेरेंट्स जेंटल पेरेंटिंग अपनाते हैं, जो सहानुभूति पर आधारित है। लेकिन एमिली ओस्टर की पैरेंटडेटा वेबसाइट पर लिखा है कि जेंटल पेरेंटिंग के पक्ष में मजबूत सबूत नहीं हैं। यह नेगेटिव तरीकों से बेहतर है, लेकिन यह पूरी तरह सिद्ध नहीं हुआ है। पॉजिटिव साइकोलॉजी की 2024 रिपोर्ट में कहा गया कि जेंटल पेरेंटिंग बच्चों को भावनाएं कंट्रोल करने और दयालु बनने में मदद करता है।
विशेषज्ञों की राय मिली-जुली है। साइकोलॉजी टुडे में 2024 में लिखा गया कि जेंटल पेरेंटिंग के पक्ष में सबूत कम हैं और यह पेरेंट्स पर ज्यादा बोझ डालता है। मदरली मैगजीन में 2024 में बताया कि जेंटल पेरेंटिंग बहुत ज्यादा नरम हो गई है, जिससे बच्चे व्यक्तित्व के हिसाब से विकसित नहीं होते। ब्राउन यूनिवर्सिटी हेल्थ की रिपोर्ट में कहा गया कि जेंटल पेरेंटिंग गलतियों को सुधारने की जगह देता है और बच्चों को भावनाएं मैनेज करने में मदद करता है। डॉ. बेकी केनेडी, जो इंस्टाग्राम पर मशहूर हैं, कहती हैं कि जेंटल पेरेंटिंग बच्चों को सुरक्षित महसूस कराती है। लेकिन एनबीसी न्यूज ने 2024 में लिखा कि यह पेरेंट्स को थका देता है और अवास्तविक उम्मीदें पैदा करता है।
सोशल मीडिया पर जेंटल पेरेंटिंग पर तीखी बहस है। X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में इयान माइल्स चेओंग ने कहा कि मिलेनियल्स जेंटल पेरेंटिंग से बच्चों को सही-गलत नहीं सिखा रहे, जिसे 1146 लाइक्स मिले। एक अन्य यूजर ने लिखा कि जेंटल पेरेंटिंग पेरेंट्स को थका देती है और बच्चे बिगड़ जाते हैं। लेकिन ओयिंकांसोला अलाबी ने कहा कि जेंटल पेरेंटिंग भावनात्मक रूप से बुद्धिमान बच्चे बनाती है, न कि अनुमति देने वाली परवरिश। मैक्लींस मैगजीन की पोस्ट में कहा गया कि जेंटल पेरेंटिंग से बच्चे ‘नो’ नहीं समझते। कई यूजर्स जैसे लेडी ग्रेवमास्टर और डैनियल बक ने इसे मानसिक स्वास्थ्य संकट का कारण बताया। वहीं, सुपरनोवा मॉमा ने कहा कि जेंटल पेरेंटिंग सजा न देने का मतलब नहीं, बल्कि समझाने का है। एक्स पर #GentleParenting हैशटैग के तहत लाखों पोस्ट्स हैं, जहां पेरेंट्स अपने अनुभव शेयर करते हैं। कुछ कहते हैं यह बच्चों को मजबूत बनाता है, तो कुछ बैकलैश देते हैं कि इससे बच्चे अनुशासनहीन हो जाते हैं।
हालांकि जेंटल पेरेंटिंग की काफी तारीफ हो रही है, लेकिन इसकी आलोचना भी कम नहीं है। साइकोलॉजी टुडे के 2024 आर्टिकल में कहा गया कि जेंटल पेरेंटिंग, पेरेंट्स पर आदर्शवादी मानकों का इतना दबाव डालती है कि वे थक जाते हैं, और इसके पक्ष में ठोस सबूत भी कम हैं। मदरली के 2024 लेख में आलोचना की गई कि यह तरीका दया और अनुमति के बीच की लाइन को धुंधला कर देता है, जिससे पेरेंट्स को कमजोर समझा जाता है। एनबीसी न्यूज की 2024 रिपोर्ट में जुलाई की एक स्टडी का जिक्र है, जिसमें 40% से ज्यादा जेंटल पेरेंट्स ने बर्नआउट और खुद पर शक की शिकायत की। 2025 के साइकोलॉजी टुडे में जेंटल पेरेंटिंग के फायदे-नुकसान पर चर्चा हुई, जहां कहा गया कि यह पुरानी सख्त परवरिश से अलग है, लेकिन बच्चों में अनुशासन की कमी पैदा कर सकती है। एमिली एडलिन के 2025 सबस्टैक में चेतावनी दी गई कि जेंटल पेरेंटिंग की प्रभावशीलता के लिए अकादमिक सबूत बहुत कम हैं। थेरापिस्ट डॉट कॉम की 2024 रिपोर्ट में कहा गया कि लोग इसे permissive parenting से भ्रमित करते हैं, जो बिना सजा के सिर्फ सहानुभूति पर जोर देती है। मैकलेस्टर यूनिवर्सिटी की 2024 रिसर्च में प्रोफेसर एनी पेजाला ने बताया कि यह पुरानी hierarchical parenting के खिलाफ बैकलैश है, लेकिन इससे बच्चे कंट्रोल से बाहर हो सकते हैं। सोशल मीडिया पर भी आलोचना जोरों पर है। X पर जिया मैकूल ने 2025 में पोस्ट किया कि जेंटल पेरेंटिंग से बच्चे आत्म-महत्वपूर्ण हो जाते हैं और दूसरों को कंट्रोल करने की कोशिश करते हैं। मेग ब्रॉक ने कहा कि यह तरीका देखना दर्दनाक है, क्योंकि बच्चे अनियंत्रित हो जाते हैं। डैनियल बक ने 2024 में लिखा कि जेंटल पेरेंटिंग बच्चों को नुकसान पहुंचाती है, क्योंकि बिना अथॉरिटी के वे कन्फ्यूज और दुखी रहते हैं। इवाना ग्रीको ने शिकायत की कि यह बच्चों की भावनाओं को ज्यादा महत्व देती है, जिससे सेल्फ-कंट्रोल सीखना मुश्किल हो जाता है। मेगा वर्मा ने 2025 में कहा कि इससे अगली पीढ़ी में narcissists की बाढ़ आएगी, बच्चे स्पॉइल्ड और सेल्फिश बनेंगे। लाइमैन स्टोन ने 2024 में एमिली ओस्टर का हवाला देकर कहा कि जेंटल पेरेंटिंग स्टाइल्स के मेटा-एनालिसिस में कोई फायदा नहीं दिखता। ये आलोचनाएं बताती हैं कि जेंटल पेरेंटिंग अच्छी लगती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से बच्चों में अनुशासन और जिम्मेदारी की कमी पैदा कर सकती है, साथ ही पेरेंट्स को मानसिक रूप से थका सकती है।
कुल मिलाकर, जेंटल पेरेंटिंग चर्चा में इसलिए है क्योंकि यह पुरानी सख्त परवरिश से अलग है और सोशल मीडिया ने इसे फैलाया है। रिसर्च दिखाती है कि यह बच्चों के भावनात्मक विकास के लिए अच्छा है, लेकिन पेरेंट्स के लिए चुनौतीपूर्ण। विशेषज्ञ कहते हैं कि बैलेंस जरूरी है – सहानुभूति के साथ सीमाएं भी। अगर आप भी पेरेंट हैं, तो अपनी फैमिली के हिसाब से इसे अपनाएं। याद रखें, कोई एक तरीका सभी के लिए परफेक्ट नहीं होता।


