देहरादून: उत्तराखंड पुलिस शिकायत प्राधिकरण (पीसीए) ने फरवरी 2023 में पिथौरागढ़ के पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत रहते हुए एक स्थानीय व्यापारी के साथ कथित रूप से कपड़े उतरवाकर मारपीट करने के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी लोकेश्वर सिंह को दोषी पाते हुए राज्य के गृह विभाग को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।
यह घटनाक्रम बुधवार को सामने आया, जबकि सिंह ने अक्टूबर में सेवा से इस्तीफा दे दिया था और अगले वर्ष जनवरी से सतत विकास से जुड़े संयुक्त राष्ट्र संबद्ध निकाय में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह की अंतिम तैनाती पौड़ी गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के रूप में रही थी।
प्राधिकरण के एक अधिकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता व्यापारी ने आरोप लगाया कि 6 फरवरी 2023 को सिंह ने उन्हें जिला पुलिस आवास में सफाई से जुड़े एक मामले के बहाने अपने कार्यालय बुलाया। वहां उन्हें सीसीटीवी की पहुंच से दूर एक कमरे में ले जाया गया, जहां सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार करते हुए बेरहमी से मारपीट की। घटना के दो दिन बाद, 8 फरवरी को उन्होंने नैनीताल में पीसीए के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान सिंह को कई बार अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। उन्हें डीजीपी कार्यालय के माध्यम से भी नोटिस भेजे गए, जिनका जवाब उन्होंने केवल तीन शपथपत्रों के जरिए दिया। इन शपथपत्रों में उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए शिकायतकर्ता को आपराधिक प्रवृत्ति का बताया, लेकिन अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। साथ ही, उनके बयानों में विरोधाभास पाए गए, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता ने चिकित्सीय रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उनके शरीर पर आई चोटों का स्पष्ट उल्लेख था। इन सभी तथ्यों के आधार पर पीसीए ने सिंह को दोषी मानते हुए राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश की है। आदेश में यह भी कहा गया है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए सरकार उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दे और की गई कार्रवाई की जानकारी प्राधिकरण को उपलब्ध कराए।
कई प्रयासों के बावजूद इस मामले पर सिंह से संपर्क नहीं हो सका।


