चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित देवताल झील इन दिनों पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, लेकिन इसकी वजह चिंताजनक है। भारत-चीन सीमा के पास माणा गांव में 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह झील अक्टूबर महीने में ही पूरी तरह से जम गई है। सामान्य तौर पर इतनी ऊंचाई वाली झीलें नवंबर के बाद जमना शुरू होती हैं, लेकिन इस बार असामान्य बर्फबारी और तापमान में अचानक आई गिरावट ने इसके पारदर्शी पानी को चमकदार बर्फ में बदल दिया है। यह नज़ारा जितना मनमोहक है, उतना ही हिमालयी क्षेत्र में हो रहे जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेतों को दर्शाने वाला भी है।
क्यों है यह घटना असामान्य?
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस क्षेत्र में तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी कम है। अक्टूबर के महीने में इतनी भारी बर्फबारी और इतना कम तापमान एक असामान्य मौसमी घटना मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र के मौसम चक्र में आ रहा उतार-चढ़ाव ही इसकी मुख्य वजह है।
देवताल झील का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
देवताल झील सिर्फ एक प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि हिंदू पौराणिक कथाओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी भी है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने इसी स्थान पर देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त किया था, इसीलिए इसका नाम ‘देवताल’ पड़ा। गर्मियों के मौसम में इस झील का पानी इतना शुद्ध और स्वच्छ होता है कि इसमें आसपास की बर्फीली चोटियों और नीले आकाश का प्रतिबिंब साफ दिखाई देता है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण और चुनौती
इस झील को सितंबर 2021 में आम पर्यटकों के लिए फिर से खोला गया था, जिसके बाद से यह ट्रेकिंग प्रेमियों के बीच एक लोकप्रिय स्थल बन गई है। झील की सतह पर जमी मोटी बर्फ इतनी मजबूत है कि पर्यटक उस पर चलते हैं और अद्भुत तस्वीरें खींचते हैं। हालांकि, प्रशासन ने पर्यटकों को सावधानी बरतने की चेतावनी भी जारी की है। ठंड, फिसलन भरे रास्ते और बर्फ़ीली हवाएं यहां की यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन की स्पष्ट निशानी
देवताल झील का इतनी जल्दी जम जाना हिमालयी पर्यावरण की नाजुकता को उजागर करता है। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालय क्षेत्र के मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव आ रहे हैं। कभी अचानक भारी बर्फबारी, तो कभी सूखा – ये सभी लक्षण जलवायु संकट की ओर इशारा करते हैं। देवताल जैसी ऊंचाई वाली झीलें इस बदलाव के प्रति सबसे संवेदनशील हैं और प्रकृति के इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यात्रा करने वाले पर्यटक इन बातों का रखें ध्यान
- चूंकि यह एक सीमावर्ती इलाका है, इसलिए इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है।
- अत्यधिक ठंड के मद्देनजर पर्याप्त गर्म कपड़े, जूते और एक्स्ट्रा सॉक्स साथ लेकर चलें।
- बर्फीले रास्तों पर चलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- अपने साथ आवश्यक दवाएं और फर्स्ट-एड किट जरूर रखें।
- स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष
देवताल झील की जमी हुई सतह और आसपास का बर्फीला लैंडस्केप एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है, लेकिन यह हमारे लिए एक चेतावनी भी है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम प्रकृति के साथ सही तरीके से पेश आ रहे हैं? जलवायु परिवर्तन के इन संकेतों को गंभीरता से लेते हुए, हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होने की सख्त जरूरत है। वरना, आने वाले समय में ऐसी असामान्य घटनाएं और भी बढ़ सकती हैं।


