Homeकुमाऊँचौखुटिया आंदोलन पर सदन में हंगामा: विपक्ष ने उठाए पुलिस दमन के...

चौखुटिया आंदोलन पर सदन में हंगामा: विपक्ष ने उठाए पुलिस दमन के गंभीर आरोप, सरकार बोली- सब मांगें मानीं

देहरादून: उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुधवार को चौखुटिया के स्वास्थ्य संकट और वहाँ से आए आंदोलनकारियों के साथ हुए कथित दमन के मुद्दे पर गर्मा गया। सदन के दूसरे दिन विपक्ष और सरकार आमने-सामने रहीं, जहाँ एक तरफ कांग्रेस ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर किया, वहीं नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस द्वारा महिला प्रदर्शनकारियों के साथ ‘कपड़े फाड़ने’ जैसे गंभीर आरोप लगाए।

धारचूला और द्वाराहाट के मुद्दों के बीच सदन में चौखुटिया का मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा। द्वाराहाट से कांग्रेस विधायक मदन सिंह बिष्ट ने सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “चौखुटिया में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं। डॉक्टरों की भारी कमी है और अस्पतालों की स्थिति बदहाल है। सरकार की तरफ से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं, ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।”

बिष्ट ने आगे कहा, “2016 के बाद से हालात और खराब हो गए हैं। डॉक्टरों की नियुक्ति तक ठीक से नहीं हो पा रही। हमने कई बार मंत्रियों और मुख्यमंत्री से फोन पर बात की, हर बार सिर्फ ‘हो जाएगा’ का जवाब मिला। सवाल यह है कि यह सब कब होगा? अगर सरकार पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था का मॉडल यहाँ लागू कर दे, तो सब कुछ ठीक हो सकता है।”

उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “35 दिन से चल रहे आंदोलन में कोई राजनीतिक लोग शामिल नहीं हैं। सरकार ने दो डॉक्टर नियुक्त किए थे, लेकिन वे भी छुट्टी पर चले गए। प्रदेश में अस्पताल खुलने चाहिए, लेकिन शराब की दुकानें खुल रही हैं।”

“विपक्ष राजनीति कर रहा,” मंत्री सुबोध उनियाल का जवाब

विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल ने कांग्रेस पर राजनीतिक रंग चढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “नेता प्रतिपक्ष अपनी कमियों को बता रहे हैं। यह सिर्फ राजनीति है। सरकार ने चौखुटिया अस्पताल को सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल का दर्जा देने का शासनादेश जारी कर दिया है और सभी मांगें मान ली गई हैं।”

मंत्री उनियाल ने दावा किया, “चौखुटिया अस्पताल में 60 डॉक्टर हैं और तीन एलएमओ हैं। दो स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति भी कर दी गई है। राजनीतिक लाभ के लिए सीधे-साधे लोगों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। लोगों को भ्रमित किया जा रहा है।”

“पुलिस ने महिलाओं के कपड़े फाड़े,” यशपाल आर्या का बड़ा आरोप

मंत्री के बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने सदन में जोरदार हंगामा किया और चौखुटिया से आए आंदोलनकारियों के साथ हुए व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाए। आर्या ने कहा, “चौखुटिया के आंदोलनकारी 400 किलोमीटर से अधिक का सफर तय करके पैदल देहरादून पहुंचे। कल पुलिस ने उनके साथ बर्बरता की। यहाँ तक कि महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए गए और कई लोगों को जबरन हिरासत में लिया गया। आज सुबह जब मैं मौके पर पहुँचा, तो वे लोग रो रहे थे।”

मंत्री के दावों को खारिज करते हुए आर्या ने कहा, “अगर सरकार ने सब कुछ कर दिया है, तो लोग आंदोलन करके यहाँ क्यों आ रहे हैं? आज तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे मिलने नहीं पहुँचा। बातें 25 सालों से हो रही हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। सरकार कॉमेडी शो कर रही है और उत्सव मना रही है, लेकिन लोगों को गुमराह न करें।”

चौखुटिया का मुद्दा अब सिर्फ स्वास्थ्य सुविधाओं का संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह जनआक्रोश और सरकारी उदासीनता का प्रतीक बन गया है। सदन में हुई इस बहस ने सरकार और प्रशासन पर उठ रहे सवालों को और गहरा कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों के साथ हुए दुर्व्यवहार की जांच कराएगी या नहीं और चौखुटिया की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के अपने वादों को कब तक जमीन पर उतार पाएगी।