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लंबे समय तक चरस गांजे का उपयोग दिमाग की संरचना बदल सकता है, निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है गलत असर

लंबे समय तक कैनाबिस का उपयोग करने से दिमाग की संरचना में बदलाव आ सकता है और इसका असर व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और प्रेरणा पर पड़ सकता है, एक अध्ययन में यह संकेत दिया गया है।

हालांकि कुछ देशों में कैनाबिस का उपयोग सीमित चिकित्सीय स्थितियों में कानूनी रूप से किया जाता है और कई लोग इसे कम जोखिम वाला मानते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय तक लगातार उपयोग इसके दुष्प्रभाव दिखा सकता है। स्पेन की एक शोध संस्था द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक कैनाबिस का सेवन करने वालों के मस्तिष्क के फ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्से में पतलापन देखा गया। यह हिस्सा योजना बनाने, निर्णय लेने और अन्य जटिल मानसिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस क्षेत्र में पतलापन आने का मतलब यह हो सकता है कि दिमाग की कोशिकाओं की संख्या या उनके बीच के संपर्क में कमी आई है। अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग लंबे समय तक और नियमित रूप से कैनाबिस का सेवन करते हैं, उन्हें जटिल कामों को करने के लिए अधिक मानसिक प्रयास करना पड़ सकता है।

शोध में यह भी सामने आया कि ऐसे उपयोगकर्ताओं में प्रेरणा की कमी देखी जा सकती है, जिससे वे काम शुरू करने या पूरा करने में पीछे रह सकते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं कि वे काम करने में पूरी तरह असमर्थ हों, लेकिन उनके लिए वही काम करने में अधिक मेहनत लग सकती है, जिससे उनकी उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी और शोध की जरूरत है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये बदलाव स्थायी हैं या कैनाबिस का उपयोग बंद करने के बाद सामान्य हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांचा जाना बाकी है कि ये बदलाव पूरी तरह कैनाबिस के कारण ही होते हैं या अन्य कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

यह अध्ययन उन वयस्कों पर किया गया जिन्होंने औसतन करीब दस वर्षों तक कैनाबिस का उपयोग किया था और कम से कम पांच वर्षों तक रोजाना इसका सेवन किया था। इन लोगों के मस्तिष्क की एमआरआई स्कैनिंग की तुलना उन लोगों से की गई जिन्होंने जीवन में बहुत कम बार कैनाबिस का उपयोग किया था।

विश्लेषण में पाया गया कि लंबे समय तक रोजाना उपयोग करने वालों के मस्तिष्क के एक खास हिस्से में संरचनात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से मौजूद थे। इससे पहले भी कुछ शोधों में युवाओं और किशोरों पर इसके प्रभाव देखे गए थे, लेकिन वयस्कों में लंबे समय तक उपयोग से जुड़े ऐसे बदलावों पर यह अध्ययन खास माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मस्तिष्क के इस हिस्से में मौजूद कुछ रिसेप्टर्स, जो कैनाबिस के प्रभाव से जुड़े होते हैं, इस बदलाव का कारण हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि जैसे-जैसे कैनाबिस को लेकर नीतियां और लोगों की सोच बदल रही है, ऐसे अध्ययन सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, ताकि सही जानकारी के आधार पर निर्णय लिए जा सकें।