देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती एंटी-इनकंबेंसी को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने मंत्रियों को सख्त संदेश दिया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कोई भी मंत्री सीट बदलकर “सेफ सीट” पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा।
बीजेपी ने इसे “सीट-हॉपिंग” पर रोक बताते हुए कहा है कि मंत्रियों को उसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना होगा, जहां से वे अभी विधायक हैं। अगर अपने क्षेत्र में काम नहीं दिखा पाए, तो टिकट कट सकता है।
तीसरी बार सरकार बनाने की तैयारी
बीजेपी उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत मंत्रियों को उनके काम के लिए सीधे जनता के सामने जवाबदेह बनाया जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अगर कोई मंत्री अपने क्षेत्र में विकास नहीं कर पाया, तो उसकी जिम्मेदारी उसी की होगी।
मंत्री के सीट छोड़ने से नुकसान: विनोद चमोली
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता और वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने कहा कि मंत्री का सीट छोड़ना पार्टी के लिए दोहरा नुकसान होता है।
उन्होंने कहा,
“कई बार ऐसा देखा गया है कि कोई विधायक जीतकर मंत्री बन जाता है और अगला चुनाव किसी दूसरी सीट से लड़ना चाहता है, ताकि स्थानीय नाराजगी से बच सके। इससे पुराने क्षेत्र के वोटर निराश होते हैं और नई सीट पर पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा होता है। संगठन इसे गलत मानता है।”
मंत्रियों की होगी रिपोर्ट कार्ड से जांच
पार्टी नेतृत्व अब मंत्रियों के कामकाज की अंदरूनी सर्वे रिपोर्ट तैयार करने जा रहा है। इस रिपोर्ट में
- मंत्री की जनता में छवि
- उनके विभाग से स्थानीय लोगों को मिला फायदा
- क्षेत्र में विकास कार्य
जैसे बिंदुओं को देखा जाएगा। इन्हीं आधारों पर आगे टिकट देने का फैसला होगा।
सिर्फ मंत्री ही नहीं, विधायक भी रडार पर
नए प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने साफ कर दिया है कि सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौजूदा विधायकों को एक साल का समय दिया गया है। अगर इस दौरान प्रदर्शन नहीं सुधरा, तो उनकी जगह नए चेहरों को मौका मिल सकता है।
अधूरा मंत्रिमंडल भी चुनौती
फिलहाल उत्तराखंड में 12 मंत्रियों की जगह के मुकाबले सिर्फ 6 कैबिनेट मंत्री काम कर रहे हैं। चंदन राम दास के निधन और प्रेमचंद अग्रवाल को हटाए जाने के बाद पांच पद खाली हैं।
मंत्रिमंडल की बनावट पर भी सवाल उठ रहे हैं।
- सतपाल महाराज, रेखा आर्या, सुबोध उनियाल और सौरभ बहुगुणा कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं
- जबकि गणेश जोशी और डॉ. धन सिंह रावत को बीजेपी की कोर टीम से माना जाता है
मुख्यमंत्री के सामने मुश्किल रास्ता
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अविकल थपलियाल का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने समय बहुत कम है।
उनके मुताबिक,
“2027 के चुनाव से पहले आपदा प्रबंधन, मानसून और फिर आचार संहिता लगने के कारण काम करने की अवधि सीमित रह जाएगी। ऐसे में अनुभवी विधायक भी कम समय के लिए मंत्री बनने से हिचक सकते हैं। दस साल की सत्ता से पैदा हुई एंटी-इनकंबेंसी को खत्म करना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी।”


