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बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल है ज़हर, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा

स्रोत: www.kafaltreelive.com | (Kafal Tree Live Uttarakhand News)

नई दिल्ली: भारत में सड़क किनारे के विक्रेताओं और छोटे-बड़े भोजनालयों द्वारा खाना पकाने के तेल का बार-बार इस्तेमाल (Reuse of Cooking Oil) सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। इसकी ‘व्यापकता’ का संज्ञान लेते हुए, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और स्वास्थ्य मंत्रालय से इस संबंध में राज्य-वार कार्रवाई रिपोर्ट माँगी है।

आयोग ने अपने नोटिस में गहरे, झागदार या अधिक गर्म किए गए तेल के पुन: उपयोग को विशेष रूप से उजागर किया है और मांग की है कि ऐसे तेल के निपटान या खाद्य श्रृंखला में इसे पुन: शामिल करने पर सख्त निगरानी रखी जाए। यह कदम इस बात पर जोर देता है कि कैसे लागत बचाने का यह सामान्य चलन देश की बड़ी आबादी के स्वास्थ्य को जोखिम में डाल रहा है। (Kafal Tree Live Uttarakhand News)

क्या कहता है विज्ञान? स्वास्थ्य खतरों की पुष्टि


स्वास्थ्य विशेषज्ञों के डर का मूल वैज्ञानिक अनुसंधान है। बार-बार गर्म किए गए तेल के उपभोग से होने वाले नुकसान पर कई पीयर-रिव्यू किए गए (peer-reviewed) अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में गंभीर निष्कर्ष प्रकाशित हुए हैं:

  • ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन: प्रतिष्ठित पत्रिका Foods में 2023 के एक अध्ययन में पाया गया कि बार-बार गर्म किए गए तेल में हानिकारक एल्डिहाइड और ट्रांस फैट (Trans Fats) उत्पन्न होते हैं। ये यौगिक लीवर और रक्त वाहिकाओं में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन (Oxidative Stress and Inflammation) को बढ़ाते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों का मूल कारण है।
  • कोलेस्ट्रॉल और किडनी को नुकसान: Environmental Science and Pollution Research में प्रकाशित एक अन्य 2023 के शोधपत्र ने रिपोर्ट किया कि बार-बार गर्म किया गया तेल लीवर की क्षति के मार्करों को बढ़ाता है, ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर बढ़ाता है और किडनी के ऊतकों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • हृदय रोग और मधुमेह का खतरा: Nutrition & Metabolism में 2022 में हुए एक अध्ययन से पता चला कि तेल के ऑक्सीकृत (oxidized) यौगिकों का सेवन इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) और हृदय रोग तथा मधुमेह (Diabetes) के शुरुआती लक्षणों को जन्म दे सकता है।

जब तेल अपने धूम्र बिंदु (Smoking Point) पर पहुँच जाता है, तो यह तेजी से टूटने लगता है, जिससे फ्री रेडिकल्स (Free Radicals) और विषाक्त यौगिक बनते हैं। यहाँ तक कि अगर तेल धूम्र बिंदु तक नहीं भी पहुंचा है, तब भी पुन: उपयोग से उसमें हानिकारक अवशेष जमा होते रहते हैं। (Kafal Tree Live Uttarakhand News)

FSSAI के दिशा-निर्देश और महंगा होता तेल


इस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को देखते हुए, FSSAI ने RUCO (Repurpose Used Cooking Oil – इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल का पुन: उपयोग)नामक एक पहल शुरू की है। इन दिशा-निर्देशों में सलाह दी गई है कि एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को रसोई में दोबारा इस्तेमाल करने के बजाय या तो फेंक दिया जाए या रीसायकल किया जाए। (Kafal Tree Live Uttarakhand News)

लेकिन, इस नियम के पालन में सबसे बड़ी बाधा लागत है। पिछले कुछ वर्षों में खाद्य तेलों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे सड़क किनारे के विक्रेता और छोटे भोजनालय आर्थिक कारणों से तेल को बार-बार इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं।

विशेषज्ञ इस बात पर भी चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि भारत में प्रति व्यक्ति ट्रांस फैट का एक्सपोजर बहुत अधिक है। इसका सीधा संबंध गहरे तले हुए स्नैक्स और बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल से है।

कौन सा तेल है अपेक्षाकृत सुरक्षित?


तेल के पुन: उपयोग के खतरों को कम करने के लिए, उच्च धूम्र बिंदु वाले तेलों को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। इनमें रिफाइंड सूरजमुखी तेल, राइस ब्रान तेल, सरसों का तेल और मूंगफली का तेल शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञ जोर देते हैं कि किसी भी तेल को बार-बार गर्म करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा करता है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। उपभोक्ताओं को गहरे तले हुए खाद्य पदार्थोंका सेवन सीमित करना चाहिए और खाद्य विक्रेताओं को FSSAI के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि ‘विषाक्त सत्य’ (Toxic Truth) खाद्य श्रृंखला का हिस्सा न बन जाए।

Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्टिंग के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए लिखा गया है। (Kafal Tree Live Uttarakhand News)