उत्तराखंड की प्राकृतिक छटा अब दुनिया भर के रंग-बिरंगे पंछियों से और भी सज गई है। राज्य की पहली रामसर साइट और देश के पहले कंजरवेशन रिजर्व (Conservation Reserve) घोषित आसन वेटलैंड (Asan Wetland) में सर्दियों की दस्तक से पहले ही विभिन्न सात प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों (Migratory Birds) ने दस्तक दे दी है। इन विदेशी मेहमानों के आगमन से झील का वातावरण कलरव से गूंज उठा है और पक्षी प्रेमियों के लिए यह स्थान एक स्वर्ग बन गया है।
कौन-कौन से हैं ये विदेशी मेहमान?
आसन वेटलैंड में इस साल जिन सात प्रमुख प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने दस्तक दी है, उनमें गैडवाल (Gadwall), यूरेशियन विजन (Eurasian Wigeon), टफ्ड डक (Tufted Duck), रेड नेप्ड आइबीज (Red-naped Ibis), ग्रे लेग गूज (Grey Leg Goose), नार्दन शावलर (Northern Shoveler) और फेरीजिनस पोचार्ड (Ferruginous Pochard) शामिल हैं। इनके अलावा भी कई प्रजातियों के पक्षी यहां आ चुके हैं।
पक्षियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
इन विदेशी पक्षियों के आगमन से आसन वेटलैंड में पक्षियों की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में यहाँ रुडी शेलडक (Ruddy Shelduck), कामन कूट (Common Coot), नाब बिल्ड डक (Knob-billed Duck) समेत कुल मिलाकर प्रवासी पक्षियों की संख्या लगभग 1200 तक पहुँच चुकी है। यह आंकड़ा अक्टूबर के अंत तक और बढ़ने की उम्मीद है, जब अधिकांश प्रवासी प्रजातियों के पक्षी यहां पहुंच जाएंगे।
पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग
पक्षियों की इस बढ़ती संख्या ने देशभर के पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफर्स को भी बर्ड वाचिंग (Bird Watching) के लिए आकर्षित किया है। आसन वेटलैंड का शांत और प्राकृतिक वातावरण इन पक्षियों को आश्रय देने के साथ-साथ बर्ड वाचर्स को उन्हें करीब से देखने और उनकी तस्वीरें लेने का एक शानदार अवसर प्रदान कर रहा है।
वन विभाग की सक्रिय भूमिका
इन कीमती प्राकृतिक धरोहर और मेहमान पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चकराता वन प्रभाग (Chakrata Forest Division) की टीम लगातार सक्रिय है। वन दारोगा प्रदीप सक्सेना के अनुसार, डीएफओ वैभव सिंह के निर्देश पर पक्षियों की सुरक्षा के लिए निरंतर गश्त की जा रही है। साथ ही, वन विभाग की टीम प्रतिदिन प्रवासी पक्षियों की गणना भी कर रही है ताकि उनकी संख्या और स्वास्थ्य पर नज़र रखी जा सके।
सबसे पहले किसने दी थी दस्तक?
इस सीजन में आसन नमभूमि में सबसे पहले सुर्खाब (Ruddy Shelduck) का ही आगमन हुआ था। इस पक्षी की संख्या अब लगभग 500 तक पहुँच चुकी है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आसन वेटलैंड का वातावरण इन प्रवासी पक्षियों के लिए कितना अनुकूल और सुरक्षित है।
निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि आसन वेटलैंड न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) है। प्रवासी पक्षियों का यहाँ आना इसके स्वच्छ और संरक्षित वातावरण का प्रमाण है। यह दृश्य हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के साथ सहअस्तित्व का महत्व भी सिखाता है।


