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BJP विधायक अरविंद पांडेय और बेटे पर जनजाति की जमीन हड़पने का आरोप

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में बुक्सा जनजाति के सदस्यों ने भाजपा विधायक अरविंद पांडेय और उनके बेटे अतुल पांडेय पर उनकी जमीन हड़पने और अवैध रूप से बेचने का आरोप लगाया है।

सेमलपुर गांव की बुक्सा महिला नन्ही देवी ने शनिवार को ग्रामीणों के साथ धरना देकर अपनी जमीन वापस दिलाने की मांग की। उनका आरोप है कि गदरपुर के विधायक अरविंद पांडेय और उनके बेटे अतुल पांडेय ने उनकी जमीन पर कब्जा कर उसे बेच दिया।

नियमों के अनुसार, जनजातीय जमीन को बिना सरकार की विशेष अनुमति के बेचा नहीं जा सकता। नन्ही देवी ने आरोप लगाया, “अतुल पांडेय ने दस्तावेजों में हेरफेर कर मेरी जमीन 28 लाख रुपये में गुरविंदर सिंह को बेच दी, जिसने बाद में उसे मक्कन सिंह को बेच दिया।”

ग्रामीणों ने शुक्रवार को उप-जिलाधिकारी अमृता शर्मा के कार्यालय पर धरना दिया और ज्ञापन सौंपते हुए सौदे को रद्द करने, जमीन वापस दिलाने और यह जांच कराने की मांग की कि विधायक या उनके बेटे ने इस तरह की कितनी जमीनें बेची हैं।

ऊधम सिंह नगर के अपर जिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा ने कहा, “हम शिकायत की जांच कर रहे हैं।”

जिले के गुलरभोज नगर पंचायत अध्यक्ष सतीश चुघ ने आरोप लगाया, “अतुल पांडेय ने अपना नाम अतुल कुमार और अपने विधायक पिता का नाम अरविंद कुमार बताकर यह धोखाधड़ी की, लेकिन बाद में खुलकर अपने कृत्य को सही ठहराने लगे।”

चुघ ने यह भी कहा कि गुरविंदर सिंह और मक्कन सिंह भी विधायक से नाराज हैं और अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि जमीन बेचने वाला असली मालिक नहीं है।

नन्ही देवी ने कहा, “हमने भाजपा को वोट दिया, और अब वही नेता हमारी जमीन हड़पकर बेच रहे हैं। मेरी ही समुदाय के कम से कम एक दर्जन लोग इसका शिकार हैं।”

स्थानीय तहसीलदार प्रताप सिंह चौहान ने बताया, “हम नन्ही देवी, संजू कुमार और मंगल सिंह की शिकायतों की जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अतुल कुमार पांडेय ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि वह पिछले 50 वर्षों से जमीन के मालिक हैं, जबकि उनकी उम्र केवल 32 वर्ष है। उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।”

बताया गया कि जिस जमीन की बिक्री की गई, उसका एक हिस्सा संजू कुमार और मंगल सिंह का भी था।

वहीं, विधायक अरविंद पांडेय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इसलिए मेरे विरोधी मुझे बदनाम करने के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। हमने कोई धोखाधड़ी नहीं की है।”

गौरतलब है कि बुक्सा जनजाति उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों में रहने वाली अनुसूचित जनजाति है, जो मुख्य रूप से खेती करती है और दैनिक जरूरतों के लिए वन संसाधनों पर निर्भर रहती है। आमतौर पर ये लोग प्रशासन के पास कम जाते हैं और अपने मामलों का निपटारा ‘तख्त’ नामक सामुदायिक परिषद के माध्यम से करते हैं। वे मुख्य रूप से भगवान शिव और चामुंडा देवी की पूजा करते हैं।