नई दिल्ली: केंद्र सरकार के अधीन वन्यजीव मामलों की स्थायी समिति ने उत्तराखंड सरकार के 19 प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। इन प्रस्तावों में राजाजी टाइगर रिजर्व और बेनोग वन्यजीव अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) में खनन गतिविधियों की अनुमति मांगी गई थी।
ये प्रस्ताव ऐसे क्षेत्रों से जुड़े थे, जिन्हें डिफॉल्ट ESZ माना जाता है—जहां खनन जैसी गतिविधियों पर रोक रहती है और इसके लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की स्थायी समिति (SC-NBWL) की मंजूरी आवश्यक होती है। नियमों के अनुसार, यदि ESZ औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं है, तो संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर का दायरा डिफॉल्ट ESZ माना जाता है, जहां विकास कार्य नियंत्रित रहते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण अध्ययन प्रस्तुत नहीं किए, जैसे नदी क्षेत्रों की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता और खनन का पारिस्थितिकी पर प्रभाव।
इसके अलावा, समिति ने यह भी कहा कि दोनों संरक्षित क्षेत्रों के ESZ अभी तक अंतिम रूप में तय नहीं किए गए हैं, जो प्रस्ताव खारिज करने का एक प्रमुख कारण बना।
इससे पहले, नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि टाइगर रिजर्व के आसपास के ESZ—जिसमें बफर और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं—को एक वर्ष के भीतर अधिसूचित करना अनिवार्य है।
बैठक के विवरण के अनुसार, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद समिति ने इन खनन प्रस्तावों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया और राज्य सरकार को कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए ESZ की अधिसूचना का मसौदा जारी करने को कहा।


