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स्कूलों की छुट्टियां घटाने पर विचार, शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

राज्य सरकार स्कूलों के शैक्षणिक कैलेंडर को बेहतर बनाने और शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन छुट्टियों में कटौती पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह पहल शिक्षा विभाग में चल रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसका मकसद पढ़ाई के समय को अधिक प्रभावी बनाना है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, संबंधित शैक्षिक संस्थान ने वर्तमान 48 दिनों की संयुक्त गर्मी और सर्दी की छुट्टियों को घटाकर 32 दिन करने का प्रस्ताव दिया है। यानी कुल 16 दिनों की कटौती की जा सकती है। इसके बदले में शिक्षकों को 10 दिन का अर्जित अवकाश (Earned Leave) देने पर भी विचार किया जा रहा है।

एक अधिकारी के मुताबिक, प्रस्तावित बदलावों के हर पहलू की समीक्षा की जा रही है और इसे संबंधित विभाग के साथ विचार-विमर्श के लिए भेजा गया था। उनसे मिली आपत्तियों और सुझावों का जवाब भी दे दिया गया है। पूरी प्रक्रिया के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

अब तक शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में कम अवकाश मिलता रहा है, जहां अन्य कर्मचारियों को सालाना 31 दिन का अर्जित अवकाश मिलता है। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव को शिक्षकों की ओर से सतर्क लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।

एक शिक्षक संगठन के प्रतिनिधि ने कहा कि यदि लंबी छुट्टियों में कटौती के साथ अर्जित अवकाश की सुविधा दी जाती है, तो शिक्षक समुदाय इसका स्वागत करेगा।

हालांकि, शिक्षा विभाग के हालिया फैसलों को लेकर कुछ असंतोष भी सामने आया है। हाल ही में सरकार ने सभी स्कूलों के लिए नए समय निर्धारित किए हैं, जिनमें गर्मियों में सुबह 7:45 बजे और सर्दियों में 9:45 बजे स्कूल खोलने का निर्देश दिया गया है।

इस फैसले पर शिक्षकों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को स्कूल पहुंचने के लिए जंगल, नदियां और कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सख्त समय-सीमा छात्रों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है और जंगली जानवरों से सामना होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

एक शिक्षक ने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पुराने शैक्षणिक समय को जारी रखना ज्यादा उचित होगा, ताकि छात्रों की सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित की जा सके।