Homeकुमाऊँशनिवार को ‘स्वर्णिम अतीत’ पढ़ेंगे छात्र, उत्तराखंड के स्कूलों में नई पहल

शनिवार को ‘स्वर्णिम अतीत’ पढ़ेंगे छात्र, उत्तराखंड के स्कूलों में नई पहल

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने नई पीढ़ी को राज्य के समृद्ध इतिहास से जोड़ने के उद्देश्य से एक विशेष पहल शुरू की है, जिसके तहत अब स्कूलों में हर शनिवार को अंतिम पीरियड ‘स्वर्णिम अतीत’ को समर्पित किया जाएगा। इस पहल में छात्रों को पहाड़ी राज्यों के महान शासकों और उनके योगदान के बारे में पढ़ाया जाएगा, ताकि वे अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शुरू की गई इस पहल में वासुदेव कत्युरी, कनकपाल, अजयपाल, प्रद्युम्न शाह, सोमचंद और ज्ञानचंद जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की गाथाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की उस सोच के अनुरूप है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इतिहास को केवल तिथियों और घटनाओं तक सीमित रखने के बजाय इसे प्रेरणा, कर्तव्यबोध, नेतृत्व और राष्ट्रभावना विकसित करने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए हर शनिवार अंतिम 30 मिनट इस विशेष अध्ययन के लिए निर्धारित किए गए हैं, ताकि मुख्य विषयों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो।

इस कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए स्कूलों में समय-समय पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। पाठ्यक्रम में गढ़वाल और कुमाऊं के इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों को शामिल किया गया है, जैसे 9वीं सदी में कनकपाल द्वारा गढ़वाल वंश की स्थापना, 14वीं सदी में अजयपाल द्वारा 52 गढ़ों का एकीकरण, गोरखा आक्रमणों के खिलाफ प्रद्युम्न शाह का संघर्ष, और कुमाऊं में चंद वंश के प्रशासनिक सुधार।

इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षा विभाग ने निगरानी की सख्त व्यवस्था भी की है। ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर के शिक्षा अधिकारी हर महीने इसकी समीक्षा करेंगे और प्रगति की रिपोर्ट निदेशालय को भेजेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रदेश के गौरवशाली इतिहास की विरासत नई पीढ़ी तक सही तरीके से पहुंचे।