मसूरी के संवेदनशील पर्यावरण को लेकर ठोस कदम न उठाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की है।
यह मामला तब शुरू हुआ था जब मसूरी में लगातार हो रहे अव्यवस्थित निर्माण को लेकर चिंता जताई गई थी। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण को 2023 के जोशीमठ हादसे जैसी चेतावनी माना गया था। इसके बाद NGT ने खुद संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि मसूरी जैसे नाजुक इलाके में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे और विकास कार्य उसकी क्षमता के अनुसार ही हों।
ट्रिब्यूनल ने सरकार को 19 तरह के जरूरी कदम उठाने को कहा था, जिनमें बड़े निर्माण कार्यों पर नियंत्रण, पहाड़ियों की मजबूती, पानी की निकासी की बेहतर व्यवस्था, पुराने भवनों की जांच और कचरा प्रबंधन शामिल थे। इसके अलावा, पर्यावरण को बचाने के लिए जैविक सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना और इलाके की क्षमता के अनुसार ही पर्यटकों की संख्या तय करना भी इन उपायों में शामिल था।
सरकार से छह महीने के भीतर इन कदमों पर रिपोर्ट देने को कहा गया था। हाल ही में दी गई रिपोर्ट पर NGT ने कहा कि इसमें कोई खास प्रगति नजर नहीं आई। ट्रिब्यूनल ने यह भी नोट किया कि सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।
इन सब बातों को देखते हुए NGT ने सख्त रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और अब इस मामले पर आगे की सुनवाई जुलाई में होगी।


