हिमालय क्षेत्र में धार्मिक ग्रंथों में वर्णित आठ ‘ॐ’ पर्वतों में से अब तक तीन की पहचान हो चुकी है। इन पर्वतों की प्राकृतिक बनावट ऐसी है कि जब उन पर बर्फ जमती है, तो स्पष्ट रूप से ‘ॐ’ का आकार दिखाई देता है। इस कारण इन्हें धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
अब तक पहचाने गए तीन ‘ॐ’ पर्वत
सबसे प्रसिद्ध ‘ॐ’ पर्वत व्यास घाटी के नाभीढांग क्षेत्र के पास स्थित है। बर्फबारी के दौरान पर्वत की सतह पर बना ‘ॐ’ चिन्ह दूर से साफ दिखाई देता है। यही कारण है कि यह स्थान श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
दूसरा ‘ॐ’ पर्वत दारमा घाटी के नागलिंग गांव के पास स्थित है। यह स्थान स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय से आस्था का केंद्र रहा है। गांव के लोग पीढ़ियों से यहां पूजा करते आ रहे हैं। इस पर्वत के नीचे सांप (नाग) के आकार जैसी एक प्राकृतिक संरचना है, जिस कारण गांव का नाम नागलिंग पड़ा। यहीं से एक छोटी धारा निकलती है, जो आगे चलकर धौलीगंगा नदी में मिलती है। इस क्षेत्र के उत्तर में पंचाचूली पर्वत श्रृंखला स्थित है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब पर्वत पर कम बर्फ होती है, तब ‘ॐ’ का आकार अधिक बड़ा और स्पष्ट दिखाई देता है। यह बर्फीली आकृति साल भर किसी न किसी रूप में नजर आती है। हालांकि भारी बर्फबारी के बाद भी चिन्ह दिखाई देता है, लेकिन उसका आकार उतना बड़ा प्रतीत नहीं होता।
तीसरा ‘ॐ’ पर्वत दारमा घाटी के ही सिपु गांव के पास देखा गया है। यहां भी अनुकूल मौसम और विशेष बर्फ जमने की स्थिति में पर्वत पर ‘ॐ’ का चिन्ह उभर आता है। हालांकि यह क्षेत्र अत्यंत दुर्गम होने के कारण वहां तक पहुंचना काफी कठिन है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शास्त्रों में वर्णित शेष पाँच ‘ॐ’ पर्वतों की खोज के लिए विस्तृत अध्ययन और सर्वेक्षण की आवश्यकता है।
नागलिंग के ‘ॐ’ पर्वत तक पहुंच
नागलिंग स्थित ‘ॐ’ पर्वत तक पहुंच अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है। गांव से लगभग 150 मीटर की चढ़ाई के बाद हिमचूली के वैयाशी बुग्याल (अल्पाइन घास का मैदान) तक पहुंचा जा सकता है, जहां से ‘ॐ’ पर्वत सीधे सामने दिखाई देता है। सर्दियों में यह क्षेत्र कई फीट बर्फ से ढका रहता है और इस समय पश्चिम दिशा से ‘ॐ’ का आकार सबसे स्पष्ट दिखाई देता है।
सात सूर्योदय और सात सूर्यास्त की अनोखी घटना
नागलिंग गांव में दिसंबर से अप्रैल के बीच एक अनोखी प्राकृतिक घटना देखने को मिलती है। इस दौरान सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है। चारों ओर ऊँचे पर्वतों के कारण दिन में सूर्य सात बार पर्वतों के पीछे छिप जाता है।
इसी कारण स्थानीय लोग मानते हैं कि इन महीनों में नागलिंग गांव में रोज़ सात सूर्योदय और सात सूर्यास्त होते हैं। अत्यधिक ठंड और लंबे समय तक छाया रहने के कारण इस अवधि में गांव के लोग निचली घाटियों में चले जाते हैं। शेष महीनों में यहां सुबह से शाम तक लगातार धूप रहती है और तब ग्रामीण वापस अपने गांव लौट आते हैं।


