देहरादून। लोऩी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले से प्रभावित डेढ़ लाख से अधिक निवेशकों को राहत देने के लिए उत्तराखंड सरकार एक विशेष एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है। इस पोर्टल के माध्यम से पीड़ित निवेशक अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे।
यह फैसला 14 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से किए गए औपचारिक अनुरोध के बाद लिया गया। इसके बाद सचिव दिलीप जवालकर ने राज्य सहकारिता विभाग को पोर्टल विकसित करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने के निर्देश दिए।
800 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप
LUCC प्रबंधन पर आरोप है कि उसने फिक्स्ड डिपॉजिट और रिकरिंग डिपॉजिट पर आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेशकों से करीब 800 करोड़ रुपये की ठगी की। यह सोसाइटी उत्तराखंड में 35 शाखाओं के माध्यम से काम कर रही थी और सैकड़ों एजेंटों के जरिए खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों से छोटी-छोटी बचत जमा करवाई गई।
जून 2024 में सामने आया घोटाला
यह घोटाला जून 2024 में उस समय सामने आया, जब LUCC के सभी कार्यालय अचानक बंद हो गए। सबसे पहले कोटद्वार थाने में त्रिप्ती नेगी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद अलग-अलग जिलों से कई शिकायतें सामने आईं।
अब तक देहरादून और हरिद्वार सहित छह जिलों में 18 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 12 से अधिक अधिकारियों व एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है।
CID से CBI को सौंपी गई जांच
शुरुआत में मामले की जांच राज्य CID कर रही थी। बाद में आशीष नेगी द्वारा दायर जनहित याचिका, जिसे बाद में विशाल छेत्री की याचिका के साथ जोड़ा गया, पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले में दखल दिया। इसके बाद जुलाई में जांच CBI को सौंप दी गई।
CBI ने 27 नवंबर को पहले दर्ज सभी 17 मामलों को मिलाकर एक संयुक्त एफआईआर दर्ज की।
दूसरे संस्थान के नाम पर भी धोखाधड़ी का आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि यह धोखाधड़ी केवल को-ऑपरेटिव बैंकिंग तक सीमित नहीं थी। फिल्म अभिनेता आयुष शाह ने बताया कि मुख्य आरोपी शबाब हुसैन उर्फ शबाब हाशिम, उसके साझेदार विश्वजीत बादल घोष और पियाली श्यामलेंदु चटर्जी ने Myfledge Private Limited नाम की एक अन्य संस्था के जरिए भी धोखाधड़ी की।
आयुष शाह के अनुसार, “इन लोगों ने मुझे और मेरी बहन मौसम शाह को कुल 4 करोड़ 44 लाख 48 हजार रुपये निवेश करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने फर्जी संपत्ति दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और नकली आयकर रिटर्न दिखाकर हमारा भरोसा जीता।”
मुख्य आरोपी अब भी फरार
जैसे-जैसे घोटाले का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे यह भी सामने आ रहा है कि मुख्य आरोपी अभी फरार हैं। बार-बार जांच एजेंसियों के सामने पेश न होने के कारण पीड़ितों ने अब अदालत का रुख किया है और गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित ऑनलाइन पोर्टल से CBI को राज्यभर में प्रभावित निवेशकों की पहचान करने और कुल वित्तीय देनदारी का आकलन करने में मदद मिलेगी।


