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उत्तराखंड के एजेंट का अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी, साइबर अपराध में सामने आया रोल, एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड विशेष पुलिस बल (एसटीएफ) ने एक अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े एक स्थानीय एजेंट को गिरफ्तार किया है। इस सिंडिकेट के बारे में कहा जा रहा है कि यह उत्तराखंड के युवाओं को विदेश में लुभावने नौकरी के झांसे में फंसाकर म्यांमार में अवैध ऑनलाइन ऑपरेशनों के लिए मजबूर कर रहा था।

कौन है गिरफ्तार एजेंट?

गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान सुनील के रूप में हुई है, जो उधम सिंह नगर जिले के जासपुर का निवासी है। सुनील से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर एसटीएफ गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है।

एसटीएफ ने दी जानकारी

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने शुक्रवार को इस संबंध में पुष्टि की। उन्होंने बताया, “हाल के प्रयासों के बाद, केंद्र सरकार के सहयोग से, उत्तराखंड के लगभग 21 युवाओं को म्यांमार से सफलतापूर्वक बचाया गया और उन्हें वापस लाया गया। जांच के दौरान एसटीएफ की टीम को पता चला कि इन पीड़ितों की तस्करी राज्य के भीतर काम करने वाले स्थानीय एजेंटों के माध्यम से की गई थी। इन एजेंटों ने युवाओं को उच्च वेतन वाली नौकरियों के प्रलोभन में फंसाया और उन्हें दिल्ली से बैंकॉक ले गए।”

क्या थी पूरी साजिश?

एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक, पीड़ितों को बाद में बैंकॉक से अवैध रूप से जंगलों और नदियों को पार करते हुए म्यांमार के के के पार्क इलाके (म्यावडी) ले जाया गया। वहां, उन्हें बंधक बनाकर रखा गया और उच्च दबाव वाली कॉलिंग स्कैम और अन्य साइबर-धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।

कैसे हुई थी शिकायत?

यह मामला तब सामने आया जब जासपुर के एक युवक मोहम्मद आजम ने गुरुवार को जासपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले के संबंध में सुनील को गिरफ्तार किया गया।

आजम के साथ क्या हुआ था?

एसएसपी भुल्लर ने बताया, “यह पाया गया कि सुनील ने धोखे से आजम को बैंकॉक भेज दिया, जिससे वह साइबर अपराधियों का गुलाम बन गया। आजम को एक अच्छे जीवन और 70,000 रुपये के वेतन का वादा किया गया था। हालांकि, बैंकॉक हवाई अड्डे पर पहुंचने पर, उसे दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया गया और नदियों और जंगलों के रास्ते नाव से म्यांमार ले जाया गया।”

कैसे हुआ था आजम का बचाव?

म्यांमार पहुंचने पर, आजम को साइबर अपराधियों को सौंप दिया गया, जहां उसे स्कैम कॉल में भाग लेने के लिए मजबूर किया गया। आजम फोन के जरिए अपने पिता से संपर्क करने में कामयाब रहा और अपनी दुर्दशा के बारे में बताया। जब पिता एजेंट सुनील के पास अपने बेटे की वापसी की मांग लेकर पहुंचे, तो सुनील ने उसक रिहाई के लिए चार लाख रुपये की मांग की।

22 अक्टूबर को आजम अपने अपहरणकर्ताओं से भागने में कामयाब रहा। उसने सीमा पर सेना के कर्मियों को अपनी स्थिति की सूचना दी, जिन्होंने तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क किया, जिसके चलते आजम और अन्य युवकों को सफलतापूर्वक बचाया जा सका।

एसटीएफ की टीम ने आजम और अन्य स्रोतों से एकत्र की गई जानकारी का इस्तेमाल कर स्थानीय सहयोगी सुनील को गिरफ्तार किया। विदेशी साइबर सिंडिकेट के साथ उसके संपर्कों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।