एक बार फिर उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का मामला सामने आया है। एक बार फिर परीक्षा हॉल में बैठे मेहनतकश छात्रों की आँखों में छलक आया आंसू देखा गया है। लेकिन इस बार, उन आँसुओं में निराशा नहीं, बल्कि न्याय की एक नई उम्मीद जगी है। उत्तराखंड के बहुचर्चित यूकेएसएसएससी (UKSSSC) पेपर लीक मामले में अब सीबीआई जांच की राह आसान हो गई है। दिल्ली मुख्यालय से आधिकारिक हरी झंडी मिलने के बाद अब यह मामला एक नए मोड़ पर पहुँच चुका है।
यह सिर्फ एक प्रश्नपत्र लीक होने का मामला नहीं है। यह उन लाखों युवाओं के सपनों के साथ हुई धोखाधड़ी का मामला है, जो रात-दर-रात जागकर, अपनी जवानी का सुख त्यागकर सिर्फ एक नौकरी की उम्मीद में मेहनत करते हैं। और अब, इस धोखे का पर्दाफाश करने के लिए देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी आगे आ रही है।
क्या है पूरा मामला? जब 35 मिनट में लीक हुआ भविष्य!
21 सितंबर 2025 का वो काला दिन… जब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा का भाग्य केवल 35 मिनट में ही लीक हो गया। परीक्षा शुरू होने के ठीक आधे घंटे के भीतर ही प्रश्न पत्र के फोटो और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। शुरुआती जांच ने एक डरावना सच उजागर किया – यह सब हरिद्वार के आदर्श बाल सदन इंटर कॉलेज बहादुरपुर जट सेंटर से शुरू हुआ था।
इस मामले में गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। अभ्यर्थी खालिद मलिक, उसकी बहन साबिया, प्रश्नपत्र हल करने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान का निलंबन, और सेक्टर मजिस्ट्रेट केएन तिवारी समेत कई लोगों पर कार्रवाई हुई। लेकिन सवाल यह था: क्या यह सिर्फ एक छोटे स्तर की घटना थी, या इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है?
धरना प्रदर्शन और सीएम धामी का बड़ा वादा
जब व्यवस्था से निराश युवा सड़कों पर उतरे, तो मामले ने एक राजनीतिक मोड़ लिया। 29 सितंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं धरना स्थल पर पहुँचे। युवाओं के बीच खड़े होकर उन्होंने दो बड़े ऐलान किए: पहला, इस मामले की सीबीआई जांच करवाई जाएगी; और दूसरा, धरना दे रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएंगे। यह वह पल था जब युवाओं के आंसू थमे और एक नई लड़ाई की शुरुआत हुई।
अब सबसे बड़ा सवाल: सीबीआई जांच का दायरा क्या होगा?
हालांकि, सीबीआई जांच की मंजूरी एक बड़ी कामयाबी है, लेकिन अब सबसे महत्वपूर्ण मोड़ आया है। जैसा कि अधिवक्ता विकेश नेगी ने बताया, क्या सीबीआई जांच सिर्फ इस एक प्रश्नपत्र (जिसके तीन प्रश्न लीक हुए) तक सीमित रहेगी? या फिर वह पिछले चार-पांच सालों में हुई सभी गड़बड़ियों, पेपर लीक के दूसरे मामलों, और उन नौकरियों की जांच करेगी जहाँ अवैध भर्तियाँ हुईं और सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरियाँ खत्म कर दी गईं?
यह वह सवाल है जिस पर लाखों युवाओं का भविष्य टिका है। अगर जांच का दायरा सीमित रखा गया, तो यह सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। लेकिन अगर दायरा व्यापक हुआ, तो उत्तराखंड के भर्ती तंत्र में छिपे बड़े से बड़े ‘नकल माफिया’ का पर्दाफाश संभव हो सकेगा।
उत्तराखंड में सीबीआई का इतिहास: कब-कब हुई है दखल?
उत्तराखंड में सीबीआई जांच कोई नई बात नहीं है। 2002 में पुलिस भर्ती घोटाला हो या फिर रणवीर एनकाउंटर केस, वन विभाग और उद्यान विभाग के घोटाले, या फिर हाल ही में LUCC फ्रॉड का मामला – सीबीआई ने कई संवेदनशील मामलों की जांच की है। हर बार इस एजेंसी से यही उम्मीद की गई है कि वह सच्चाई को सामने लाएगी। अब एक बार फिर, युवाओं का भविष्य इसी एजेंसी के हाथों में है।
न्याय की जंग: अब क्या होगा अगला कदम?
अब एसआईटी द्वारा अब तक की गई जांच के सभी दस्तावेज और सबूत सीबीआई को सौंपे जाएंगे। यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सीबीआई की विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले की हर एक कड़ी की छानबीन करेगी। उम्मीद की जा रही है कि इस जांच में वो सभी लोग शामिल होंगे जो इस गंदे खेल का हिस्सा रहे हैं, चाहे वे किसी भी पद पर क्यों न बैठे हों।
यह सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं को दिया गया एक वादा है। एक उम्मीद है कि अब कोई भी उनके सपनों से खिलवाड़ नहीं कर सकता। क्या आपको लगता है कि इस सीबीआई जांच से छात्रों को सच्चा न्याय मिल पाएगा? क्या इससे भर्ती व्यवस्था में सुधार आएगा? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।


