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वैली ऑफ वर्ड्स फेस्टिवल में होगी ‘देवभूमि के भविष्य’ पर चर्चा: शेखर पाठक होंगे मुख्य वक्ता

देहरादून। उत्तराखंड के गठन के 25 साल पूरे होने का जश्न राज्य की सबसे बड़ी साहित्यिक और सांस्कृतिक महफिल ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ (शब्दों की घाटी) में मनाया जाएगा। इस खास मौके पर मशहूर इतिहासकार शेखर पाठक मुख्य भाषण देंगे और इस हिमालयी राज्य की यात्रा को चित्रित करेंगे। वहीं, छात्र नौ अलग-अलग भाषाओं में ‘उत्तराखंड @ 2047‘ पर अपना विजन पेश करेंगे।

पारंपरिक पहचान बनाम आधुनिक विकास: क्या है सही रास्ता?

यह उत्सव सिर्फ जश्न मनाने का नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य पर गंभीर सवाल उठाने का भी मौका होगा। फेस्टिवल में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उत्तराखंड अपनी हरी-भरी पहाड़ी वादियों और पारंपरिक संस्कृति को बचाते हुए आधुनिक विकास की राह पर चल सकता है?

आयोजकों द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, “पारंपरिक और आधुनिकता के बीच एक नाजुक संतुलन है। सार्वजनिक परिवहन और यात्रा के बुनियादी ढांचे की जरूरत है, जो बदलाव को सही ठहराता है।” फेस्टिवल में इन्हीं सवालों पर गहन चर्चा होगी:

  • क्या स्टार्ट-अप संस्थापक स्थानीय स्तर पर टिकाऊ व्यवसाय खड़े कर पाएंगे?
  • क्या पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला को शामिल करते हुए टिकाऊ आवास बनाए जा सकते हैं?
  • क्या देवभूमि की गहरी आध्यात्मिक जड़ों का सम्मान, राजनीतिकरण या ‘एलीट लक्जरी’ के दबाव के बिना किया जा सकता है?

कब और कहाँ हो रहा है आयोजन?

वैली ऑफ वर्ड्स लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल का नौवां संस्करण 25 और 26 अक्टूबर को देहरादून में आयोजित किया जाएगा। इसकी शुरुआत गुरु तेग बहादुर की शहादत की 350वीं वर्षगांठ पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम से होगी, जिसका उद्घाटन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) करेंगे।

फेस्टिवल में क्या-क्या होगा खास?

इस साहित्यिक उत्सव में देश-विदेश के कई जाने-माने हस्तियां हिस्सा लेंगी:

  • कुसुम खेमानी, कारण माधोक, अशोक वाटकर, सोनी पांडे जैसे पुरस्कार विजेता लेखक देहरादून में अपनी कहानियों पर बातचीत करेंगे।
  • स्थानीय कलाकारों सतपाल गांधी और भूमेश भारती की कलाकृतियाँ प्रदर्शित होंगी।
  • ट्राइब्स ऑफ इंडिया और NAFED जैसे संगठन देश भर के हथकरघा और बागवानी उत्पादों की स्टॉल लगाएंगे।
  • मशहूर यायावर नितिन गैरोला, रत्न मनुचा के साथ प्रकृति में अपनी यात्राओं की एक स्लाइडशो प्रस्तुति देंगे।
  • राज्य की रजत जयंती के महत्व, पलायन और टिकाऊ विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर परिचर्चाएं आयोजित होंगी।

राज्य के नागरिकों के लिए एक विचार-प्रवर्तक उत्सव

वैली ऑफ वर्ड्स फेस्टिवल का यह नौवां संस्करण न केवल साहित्य और कला का जश्न मनाएगा, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और उसके भविष्य को आकार देने वाले जरूरी मुद्दों पर एक सार्थक संवाद भी शुरू करेगा। यह उत्सव देहरादून और उससे बाहर के सभी नागरिकों के लिए विचारोत्तेजक दो दिन प्रदान करने के लिए तैयार है।