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उत्तराखंड में ‘अर्बन नक्सल’ कहने पर कांग्रेस ने दर्ज की आपत्ति

देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार और कांग्रेस के बीच जारी शब्दजंग में एक नया शब्द जुड़ गया है – ‘अर्बन नक्सल’ (Urban Naxal)। कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि जनता के मुद्दों पर नाकाम रहने के बाद अब सरकार ‘अर्बन नक्सल’ शब्द के पीछे छिपने की कोशिश कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 अक्टूबर को काशीपुर में एक भाषण के दौरान कहा था कि ‘अर्बन नक्सल गैंग’ राज्य के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। सीएम का यह बयान हाल ही में देहरादून में यूकेएसएससी (UKSSSC) परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर सरकारी नौकरी के चाहवानों द्वारा आयोजित आठ-दिवसीय धरने के संदर्भ में था। सीएम धामी ने कहा था, “आज अर्बन नक्सल गैंग और देश-विरोधी टूलकिट हमारे खिलाफ साजिश रच रहे हैं… वे सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध करते हैं… उन्हें देश-विरोधी ताकतों का समर्थन प्राप्त है… लेकिन मैं उत्तराखंड में अर्बन नक्सल्स की योजनाओं को सफल नहीं होने दूंगा।”

कांग्रेस ने क्या उठाए सवाल?

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UKPCC) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने शनिवार को देहरादून में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर जमकर निशाना साधा। धस्माना ने कहा, “भाजपा सरकार जनता से जुड़े हर मोर्चे पर पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है और अब जनता को गुमराह करने के लिए काल्पनिक मुद्दों के पीछे छिपने की कोशिश कर रही है। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए उन्होंने अब ‘अर्बन नक्सल’ शब्द गढ़ लिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ये तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ आखिर हैं कौन? धस्माना ने मांग की, “अगर राज्य में ऐसी कोई गैंग सक्रिय हैं, तो सरकार को उनके नेताओं का खुलासा करना चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि क्या उसने इस संवेदनशील मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्रालय को दी है।”

सीमा राज्य की सुरक्षा का सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान का जिक्र करते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि नक्सलवाद का उन्मूलन अपने अंतिम चरण में है, धस्माना ने सवाल उठाया कि केंद्र सरकार उत्तराखंड में ‘अर्बन नक्सलिज़्म’ की इस ‘नई स्थिति’ को कितनी गंभीरता से ले रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा, “उत्तराखंड एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य है जिसकी सीमाएं चीन, तिब्बत और नेपाल से लगती हैं। अगर यहाँ अर्बन नक्सलिज़्म उभरा है, तो यह एक गंभीर मामला है, और सरकार को इसका जवाब देना ही चाहिए।”

बेरोजगारी से लेकर कानून व्यवस्था तक – कांग्रेस ने गिनाए सरकार के ‘कमजोर मोर्चे’

धस्माना ने आरोप लगाया कि लगातार दो कार्यकाल तक राज करने के बाद भी पार्टी अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है और उसके पास दिखाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा, “भाजपा ने अर्बन नक्सल्स का नया नारा गढ़ा है और मुख्यमंत्री से लेकर पार्टी कार्यकर्ता सभी एक सुर में इसका जाप कर रहे हैं।”

उन्होंने निम्नलिखित मुद्दों पर सरकार पर हमला बोला:

  • बेरोजगारी (Unemployment): आरोप लगाया कि बेरोजगारी अपने चरम पर है और सरकार 26,000 सरकारी नौकरियों की भर्ती के फुलाए हुए आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह कर रही है। कांग्रेस ने पिछले साढ़े तीन साल में सरकारी भर्ती का विभागवार ब्यौरा देते हुए एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
  • समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work): आरोप है कि सरकार ने नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण लिमिटेड (UPNL) के कर्मचारियों को समान वेतन और नियमितीकरण नहीं दिया है।
  • महिला सुरक्षा (Women Safety): आरोप लगाया गया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा, हत्या और बलात्कार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं और कई मामलों में सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्य शामिल हैं। धस्माना ने कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था बदहाल है।
  • स्वास्थ्य सेवाएं (Health Services): चौखुटिया में हाल में हुए जनाक्रोश का हवाला देते हुए राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना की।
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management): आरोप लगाया कि आपदा प्रबंधन प्रणाली “पूरी तरह से धराशायी” हो गई है और सरकार धराली त्रासदी में मरने वालों की सही संख्या तक का पता नहीं लगा पाई है।

भाजपा ने क्या कहा?

दूसरी ओर, भाजपा के राज्य मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया। चौहान ने कहा कि उत्तराखंड की जनता कांग्रेस की छल-कपट से भली-भांति परिचित है और उसने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को सबक सिखाया है।

उन्होंने कहा, “वे झूठे नैरेटिव से राज्य की जनता को गुमराह नहीं कर सकते। जनता ने पहले ही 2017 और 2022 के चुनावों में उन्हें सबक सिखाया है, और 2027 में उन्हें और भी बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा।”

साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड की राजनीति में ‘अर्बन नक्सल’ एक नया और विवादास्पद मुद्दा बनकर उभरा है। सत्ता और विपosition के बीच यह बहस अब शब्दों के नए जंग के मैदान में तब्दील हो गई लगती है।