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उत्तराखंड में अनिवार्य हुआ फायर सेफ्टी ऑडिट, यात्री वाहनों को 15 दिन में जमा करनी होगी रिपोर्ट

राजस्थान के जैसलमेर में एसी स्लीपर बस में लगी भीषण आग से 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत के बाद उत्तराखंड परिवहन विभाग ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने राज्य में संचालित सभी यात्री वाहनों का फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य कर दिया है और इसकी रिपोर्ट 15 दिन के भीतर जमा करने का आदेश जारी किया है।

किसे भेजा गया है आदेश?

परिवहन सचिव बृजेश संत के निर्देश पर संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) देहरादून संदीप सैनी की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। इसके तहत उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC), सभी स्टेज कैरिज बस ऑपरेटर्स, टैक्सी-मैक्सी कैब एसोसिएशन, और स्कूली वाहन एसोसिएशन को पत्र लिखकर निर्देश दिए गए हैं।

आदेश में कहा गया है कि सभी संस्थाओं को आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) से मान्यता प्राप्त एजेंसी से ही अपने वाहनों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराना होगा। इस ऑडिट की रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर परिवहन विभाग को उपलब्ध करानी होगी।

फिटनेस पर पड़ेगा असर

इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अगर किसी वाहन के पास वैध फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट नहीं होगी, तो उस वाहन की फिटनेस अगले साल नवीनीकरण के लिए जारी नहीं की जाएगी। यह कड़ा कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि सभी वाहन मालिक इस नियम का पालन करें और यात्री सुरक्षा को गंभीरता से लें।

वाहनों में अग्निशमन यंत्र और प्रशिक्षण अनिवार्य

परिवहन विभाग के पत्र में केवल ऑडिट तक ही सीमित नहीं रहा। विभाग ने वाहनों में अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) होने पर भी जोर दिया है। आदेश के अनुसार, सभी यात्री वाहनों में लगा अग्निशमन यंत्र वैध और पूरी तरह से क्रियाशील अवस्था में होना चाहिए।

इसके साथ ही, विभाग ने यह भी अनिवार्य किया है कि वाहन का चालक, परिचालक (कंडक्टर) और कोई भी सहायक स्टाफ अग्निशमन यंत्र को सही तरीके से चलाने का प्रशिक्षण प्राप्त हो। यह कदम आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

विभिन्न संस्थाओं को भेजे गए अलग-अलग निर्देश

परिवहन विभाग ने सभी हितधारकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • परिवहन निगम: निगम के महाप्रबंधक (संचालन) को उनकी सभी बसों की वायरिंग जांच और फायर सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
  • निजी बस ऑपरेटर्स: देहरादून आईएसबीटी से संचालित होने वाली सभी निजी बसों का ऑडिट मैसर्स देवभूमि एआईटीपी होल्डर्स ट्रांसपोर्टर्स एंड एजेंट वेलफेयर सोसाइटी को कराना है और रिपोर्ट विभाग को जमा करनी है।
  • अन्य संघ: टैक्सी, मैक्सी और स्कूल वाहन संघों को भी इसी तरह का पत्र भेजकर ऑडिट कराने को कहा गया है।

निष्कर्ष

जैसलमेर की दुखद घटना के बाद उत्तराखंड परिवहन विभाग का यह त्वरित कार्यवाही एक सराहनीय कदम है। इससे न केवल यात्री वाहनों में सुरक्षा मानकों में सुधार होगा, बल्कि चालकों और स्टाफ में आपात स्थिति से निपटने की तैयारी भी बढ़ेगी। यह पहल राज्य में यात्रा को एक सुरक्षित अनुभव बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।