रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (Corbett Tiger Reserve) एक बार फिर पर्यटकों के लिए अपने द्वार खोलने जा रहा है। मानसून सीजन के बाद हर साल की तरह इस बार भी 15 अक्तूबर से बिजरानी जोन (Bijrani Zone) को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही रामनगर वन प्रभाग (Ramnagar Forest Division) के सीतावनी (Sitabani) और भंडारपानी जोन (Bhandarpani Zone) भी सैलानियों के लिए खुले रहेंगे।
वन विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि मानसून में सुरक्षा कारणों से 30 जून से बिजरानी जोन को बंद किया गया था, जिसे अब पुनः खोला जा रहा है। वहीं एसडीओ अंकित बडोला ने बताया कि सीतावनी और भंडारपानी जोन के साथ-साथ कॉर्बेट फॉल (Corbett Fall) और बाराती रॉ (Barati Rau) को भी शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा कालाढूंगी जोन (Kaladhungi Zone) को 1 नवंबर से खोला जाएगा।
अक्टूबर-नवंबर में सफारी का खास समय
अक्तूबर और नवंबर का महीना कॉर्बेट पार्क सफारी (Corbett Safari) के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय मौसम सुहावना होता है और जंगल हरियाली से भरा होता है। नदियाँ और झरने पानी से लबालब होते हैं, जिससे पार्क की प्राकृतिक सुंदरता चरम पर होती है।
इस मौसम में दिखने वाले प्रमुख पशु-पक्षी
इस समय पार्क में कई तरह के वन्यजीव (Wildlife) और पक्षी (Birds) देखे जा सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- बाघ (Tiger) – बिजरानी और ढिकाला जोन में अक्सर नजर आते हैं।
- हाथी (Elephant) – झिरना और सीतावनी क्षेत्रों में बड़े झुंडों में दिखते हैं।
- हिरण, चीतल और सांभर (Deer Species) – हर जोन में सामान्य रूप से दिखते हैं।
- जंगली सूअर, घुरल, और भालू (Wild Boar, Goral, Bear) – पहाड़ी और घने इलाकों में देखे जा सकते हैं।
- पक्षी (Birds) – इस मौसम में सर्दियों के मेहमान प्रवासी पक्षी जैसे रूडशेल डक (Ruddy Shelduck), ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क (Black-Necked Stork), किंगफिशर (Kingfisher), क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (Crested Serpent Eagle) और ग्रेट हॉर्नबिल (Great Hornbill) आम तौर पर दिखाई देते हैं।
सफारी के दौरान सावधानियाँ
कॉर्बेट पार्क में सफारी करते समय पर्यटकों को वन नियमों (Forest Rules) का पालन करना जरूरी है। वाहन से बाहर न निकलें, जानवरों को भोजन न दें और कैमरे की फ्लैश लाइट का प्रयोग सीमित रखें।
उत्तराखंड पर्यटन के लिए बेहतर शुरुआत
कॉर्बेट जोनों के खुलने से न केवल पर्यटन (Tourism) को बल मिलेगा बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका (Livelihood) पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां वन्यजीव देखने आते हैं, जिससे उत्तराखंड की पहचान एक प्रमुख इको-टूरिज्म (Eco-Tourism) डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत होती है।


