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उत्तराखंड में नेपाल, भूटान और तिब्बत के लोगों के लिए विवाह पंजीकरण नियमों में ढील

उत्तराखंड सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) के अंतर्गत विवाह पंजीकरण नियमों में संशोधन किया है। यह संशोधन खासतौर पर नेपाल (Nepal), भूटान (Bhutan) और तिब्बत (Tibet) मूल के उन नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है और जो राज्य में निवास करते हुए अपना विवाह पंजीकृत करवाना चाहते हैं।

नए संशोधन के तहत क्या बदला?

13 अक्टूबर 2025 को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह संशोधन मंजूर किया गया। अब इन देशों के नागरिक विदेश पंजीकरण अधिकारी (Foreign Registration Officer) द्वारा जारी प्रमाणपत्र के माध्यम से विवाह पंजीकरण करवा सकेंगे।

राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, “नए नियमों के तहत विदेशी नागरिक अब अपनी नागरिकता प्रमाणपत्र (Citizenship Certificate), निवास प्रमाणपत्र (Residence Certificate), पासपोर्ट (Passport) या किसी मान्य पहचान पत्र (Valid Identity Card) को अपलोड करके विवाह पंजीकरण कर सकते हैं।” इस प्रकार, नेपाल, भूटान और तिब्बत के नागरिक जो पहले से विवाहित हैं या विवाह की तैयारी में हैं, वे अब अपने दस्तावेज़ों के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

यह संशोधन केवल कानूनी सुविधा नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। उत्तराखंड की सीमाएँ नेपाल, भूटान और तिब्बत से मिलती हैं और सदियों से इन क्षेत्रों के लोगों का राज्य के साथ सामाजिक, पारिवारिक और वैवाहिक रिश्ता रहा है।

राज्य सरकार का मानना है कि ये लोग उत्तराखंड के सामाजिक न्याय तंत्र (Social Justice System) का हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें किसी भी कानूनी प्रक्रिया से अलग रखना उचित नहीं होगा। यह निर्णय इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है जो समान नागरिक अधिकारों (Equal Civil Rights) की भावना को सशक्त करता है।

विवाह पंजीकरण में वृद्धि

राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद से विवाह पंजीकरण की गति लगातार बढ़ रही है। अब तक 4 लाख से अधिक लोगों ने UCC पोर्टल (UCC Portal) पर अपना विवाह पंजीकृत किया है।

UCC की प्रमुख बातें

  • UCC विधेयक फरवरी 2024 में पारित हुआ था।
  • जनजातीय समुदायों (Tribal Communities) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
  • इसमें हलाला (Halala), इद्दत (Iddat) और तलाक (Talaq) जैसी प्रथाओं पर पूर्ण प्रतिबंध है।
  • महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार (Property and Inheritance Rights) में समान अधिकार दिए गए हैं।
  • विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य (Mandatory Registration) किया गया है, अन्यथा सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
  • लिव-इन रिश्तों (Live-in Relationships) का पंजीकरण भी जरूरी किया गया है, और ऐसे रिश्तों से जन्मे बच्चों को वैध (Legitimate Child) माना जाएगा।

सकारात्मक पहल की दिशा में कदम

उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय केवल कानूनी प्रावधान नहीं बल्कि सीमावर्ती देशों से गहरे सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों का सम्मान भी है। इससे नेपाल, भूटान और तिब्बत से जुड़े हजारों परिवारों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।


  1. राज्य सरकार की प्रेस विज्ञप्ति और कैबिनेट बैठक की जानकारी।
  2. Uniform Civil Code (UCC) – Uttarakhand Official Portal।
  3. Indian Express / The Hindu / Hindustan Times रिपोर्ट्स (अक्टूबर 2025)।
  4. काफल ट्री रिसर्च डेस्क द्वारा संकलित जानकारी।