उत्तराखंड सरकार ने वन्य प्राणी सप्ताह के अवसर पर वन्य जीव हमलों में मुआवजे की राशि को बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। अब वन्य जीव हमले में मृत व्यक्ति के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा, जो पहले 4 लाख और फिर 6 लाख रुपये था। यह नया प्रावधान राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ते वन्य जीव हमलों को देखते हुए लागू किया गया है।
वन्य जीव हमलों का आंकड़ा
उत्तराखंड में वन्य जीव हमले एक गंभीर समस्या बने हुए हैं। वर्ष 2000 से 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वन्य जीवों के हमलों में 1,055 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,375 लोग घायल हुए हैं। पिछले 25 वर्षों में 1,250 से अधिक मौतें और 6,000 से ज्यादा लोग घायल होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने मुआवजे की राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है।
किन जानवरों के हमले पर मिलेगा मुआवजा?
सरकार ने मुआवजे के लिए निम्नलिखित वन्य जीवों के हमलों को शामिल किया है:
- मानव को हानि: बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जंगली हाथी, भालू, लकड़बग्घा, मगरमच्छ, घड़ियाल, जंगली सुअर, मधुमक्खी, ततैया, सांप, लंगूर और बंदर।
- पशुओं को हानि: बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, जंगली हाथी, सभी प्रकार के भालू, लकड़बग्घा, जंगली सुअर, मगरमच्छ, घड़ियाल, सांप।
- फसलों और मकानों को नुकसान: जंगली हाथी, जंगली सुअर, नील गाय, काकड़, सांभर, चीतल, लंगूर और बंदर।
मौत की स्थिति में मुआवजा राशि अब 10 लाख रुपये होगी, जो प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी।
मुआवजे की दरें
नए प्रावधान के तहत मुआवजे की दरें इस प्रकार हैं:
- साधारण चोट: 15,000 से 16,000 रुपये
- गंभीर चोट: 1 लाख रुपये
- आंशिक रूप से अपंग: 1 लाख रुपये
- पूरी तरह अपंग: 3 लाख रुपये
- मौत: 10 लाख रुपये
धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने चेतावनी दी है कि मुआवजे के लालच में कुछ लोग बुजुर्गों, दिव्यांगों या मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्तियों को जानबूझकर जंगल की ओर भेज देते हैं। ऐसे मामलों में मुआवजे का दावा करना अपराध माना जाएगा। झूठे दावों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की सजा भी शामिल हो सकती है।


